नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लगता है कि 2019 में सपा-बसपा और कांग्रेस मिल जाएं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से भी चुनाव नहीं जीत पाएंगे. राहुल के दावों में कितना दम है ये तो 2019 के चुनाव में ही पता चलेगा लेकिन अगर 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव का डाटा देखें तो कहा जा सकता है कि सपा, बसपा और कांग्रेस ही नहीं बल्कि सारा विपक्ष एकजुट होकर भी नरेंद्र मोदी को वाराणसी संसदीय सीट पर मात नहीं दे सकेगा.


बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन की राह पर हैं. इस गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस होगी या नहीं, ये तय नहीं है. इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक में रविवार को कहा कि यदि तीनों पार्टियां साथ आती हैं तो मोदी शायद वाराणसी सीट भी हार जाएं. राहुल ने कहा, 'मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वह तीनों दलों के खिलाफ खड़े होकर दिखाएं.'


मोदी ने वाराणसी को कर्मभूमि बनाया


2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने यूपी की वाराणसी संसदीय सीट को अपनी कर्मभूमि बनाया. वाराणसी के लोगों ने मोदी को दिल से स्वीकार किया. 2014 के चुनाव में 10 लाख 30 हजार 685 वोटरों ने मतदान किया. 2009 की तुलना में 2014 के चुनाव में 15 फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई.


विपक्ष के वोट से ज्यादा मोदी के मिले वोट


नरेंद्र मोदी को बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले, जो कि कुल वोट का 56 फीसदी हिस्सा रहा. जबकि आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार 238 वोट मिले. कांग्रेस उम्मीदावर अजय राय को 75 हजार 614, बसपा के विजय प्रकाश जयसवाल को 60 हजार 579, सपा के कैलाश चौरसिया को 45 हजार 291 और टीएमसी की इंदिरा तिवारी को 2674 वोट मिले. यानी मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले सभी विपक्षी दलों के वोट को मिला दें तो कुल 3 लाख 93 हजार 396 वोट होते हैं. इसके बावजूद मोदी के कुल वोट इनसे 1 लाख 87 हजार 626 अधिक हैं.


वाराणसी संसदीय सीट में पांच विधानसभा सीटें


गौरतलब है कि वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें रोहनियां, उत्तर वाराणसी, दक्षिण वाराणसी, कैंट वारणसी और शिवपुरी विधानसभा सीटें आती हैं.2017 के विधानसभा चुनाव में चार सीटें बीजेपी ने जीतीं और एक सीट सहयोगी पार्टी अपना दल के पास है. ये तब हुआ जब विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस ने मिलकर लड़ा.


2017 के विधानसभा सीटों के आकड़े


रोहनियां विधानसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार सुरेंद्र नारायण सिंह को 1  लाख 19 हजार 885 वोट मिले थे. जबकि सपा को 62 हजार 332 और बसपा को 30 हजार 531 वोट मिले. यानी दोनों पार्टियों के वोट मिलाकर भी बीजेपी से कम हैं. उत्तर वाराणसी सीट पर बीजेपी को 1 लाख 16 हजार 17 वोट मिले, वहीं कांग्रेस को 70 हजार 515 और बसपा को 32 हजार 874 वोट मिले. यहां भी दोनों पार्टियों के वोट मिलाने के बाद भी बीजेपी से कम हैं.

दक्षिण वाराणसी सीट पर बीजेपी को 92 हजार 560 वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस को 75 हजार 334 और बसपा को 5 हजार 922 वोट मिले. इसी तरह से मुस्लिम बहुल वाराणसी की कैंट सीट का नतीजा रहा. इस सीट पर बीजेपी को 1 लाख 32 हजार 609 वोट मिले. जबकि कांग्रेस को 71 हजार 283 और बसपा को 14 हजार 118 वोट मिले. शिवपुरी सीट को बीजेपी ने अपनी सहयोगी पार्टी अपना दल को दिया था. इस सीट से अपना दल को 1 लाख 3 हजार 423 वोट मिले थे. वहीं सपा को 54 हजार 241 और बसपा को 35 हजार 657 वोट. इस सीट पर भी दोनों विपक्षी पार्टियों के वोट मिलाने के बाद भी बीजेपी से कम हैं.


वाराणसी की पांचों विधानसभा के चुनावी नतीजे के लिहाज से बीजेपी उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं. जबकि सभी विपक्षी पार्टियों के वोट मिलने के बाद भी बीजेपी के आंकड़े को छू नहीं पा रहे हैं. ऐसे में अगर 2014 के लोकसभा चुनाव या फिर 2017 के विधानसभा चुनाव जैसी वोटिंग हुई तो नरेंद्र मोदी को यहां हराना राहुल और बाकि विपक्षी नेताओं का ख्वाब ही रहेगा.