जगन्नाथ से आपकी मुलाकात होगी तो आप एक साथ कई सारी भावनाओं से घिर जाएंगे. शायद, आपको उनसे संवेदना होगी क्योंकि उनके पास आपकी तरह दोनों हाथ नहीं हैं.  उन्हें देखकर आपको हैरानी होगी कि बिना हाथों के भी वो ज़िंदगी के सारे काम इतनी आसानी से कैसे कर लेते हैं. जगन्नाथ, इस दुनिया में बिना हाथों के आए पर आज वो अपने गांव और सबके लिए हिम्मत और हौसले की मिसाल बन गए हैं.


25 साल के जगन्नाथ, पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले के हबीबपुर के पलाशबोना गांव के रहने वाले हैं. बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया छिन गया, जिसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. जगन्नाथ मेहनत मजदूरी कर के परिवार का पेट पालते हैं.


आटा पिसाने से लेकर घर के सारे काम, वो खुद ही करते हैं. हाथों के बिना भी वो तेज रफ्तार से साइकिल चला लेते हैं. जगन्नाथ को खेतों में फावड़ा चलाते देख हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है, पर वो बड़ी आसानी से ये कर लेते हैं.

शुरू से ही जगन्नाथ की पढ़ाई में बेहद रुचि रही है. परिवार चलाने की जिम्मेदारी को उन्होंने कभी भी अपनी पढ़ाई के बीच नहीं आने दिया. जगन्नाथ ने मेहनत से ग्रेजुएशन पूरा किया है और वो भूगोल में स्नातक कर रहे हैं. वो पढ़ लिखकर टीचर बनना चाहते हैं.