कटिहार। बिहार में कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में हर वर्ष बाढ़ आती है। इसलिए यहां अधिकांश मकान कच्चे हैं। गर्मी में इन्हीं घरों में चूल्हे से आग लगती है और बाढ़ में जो बचा रहता है, वह आग की भेंट चढ़ जाता। इस समस्या से निपटने के लिए गांव के लोगों ने चूल्हे पर पहरेदारी की व्यवस्था शुरू की है। गांव में कमेटी बनाई गई है, जो लोगों को खाना बनाने के बाद चूल्हे की आग को ठीक से बुझाने और तेज हवा के दौरान खाना न बनाने की सलाह देती है।


कमेटी निगरानी भी रखती है, ताकि कोई गलती न कर बैठे। प्रखंड के बबला बन्ना, युसूफ टोला समेत अन्य गांवों में अगलगी की भीषण घटनाएं हो चुकी हैं। इस कारण गांवों में फरवरी के बाद ही समिति का गठन कर आग पर नजर रखी जाती है। दिन में 10 बजे के बाद जब हवा तेज होने लगती है, तब समिति यह निगरानी करती है कि किसी घर में चूल्हा नहीं जले। इस नियम का उल्लंघन करने पर ग्रामीणों की ओर से संबंधित परिवार को चेतावनी मिलती है और जुर्माना भी भरना पड़ता है। अलग-अलग गांवों में यह जुर्माना अलग-अलग होता है।


इस वर्ष भी जले हैं 100 से ज्यादा घर


निगरानी की वजह से चूल्हे से आग लगने की घटनाएं कम हुई हैं। हालांकि अन्य कारणों से आग लगती है। इस वर्ष भी अबतक यहां 100 परिवारों के घर जल गए हैं। आवागमन की दिक्कतों की वजह से अग्निशमन वाहन नहीं पहुंच पाते। ग्रामीण अतुल शाह, प्रकाश चौधरी आदि ने बताया कि और सतर्क रहने की जरूरत है। पिछले एक माह के अंदर यहां गदाई दियारा, पहाड़पुर व गारद टोला में हुई अगलगी की घटनाओं में 100 घर जल चुके हैं।


अंचलाधिकारी कुमार रवींद्रनाथ ने बताया कि अंचल प्रशासन द्वारा आपदा विभाग से जारी गाइडलाइन के जरिये लोगों को आग से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है। कुछ गांवों में लोगों ने इस दिशा में बेहतर पहल की है।