शुक्रवार दि॰ 16.03.18 चैत्र कृष्ण चतुर्दशी, शकुनिकारण, शतभिषा नक्षत्र, सध्य योग भी है। शुक्रवार का दिन, चैत्र का महिना और शतभिषा नक्षत्र आद्या शक्ति के पूजन को समर्पित है। ऐसे योगा योग में मूल प्रकृति के लक्ष्मी स्वरूप का पूजन किया जाता है। शास्त्रों में देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का वर्णन है। आठ स्वरूपों में से छठे स्थान पर देवी विजयालक्ष्मी मानी जाती हैं। विजयालक्ष्मी का अर्थ है जो लक्ष्मी अर्थ कर्म और धन क्षेत्र में विजय दिलवाती है। कलयुग में धन के बिना संसार का कोई सुख संभव नहीं है। संसार में अनेक प्रकार के दुःख हैं। दारिद्र्य दुःख से बढ़कर कोई बड़ा दुःख नहीं है। यही मनुष्य की सबसे बड़ी हार भी है। व्यक्ति गरीबी के कारण ही संसार में हर जगह पर हार का सामना करता है। दारिद्र्य के निवारण के लिए और सांसरिक जीत के लिए देवी महालक्ष्मी के विजयालक्ष्मी स्वरुप का पूजन विधि विधान से किया जाता है।



विजय लक्ष्मी को शास्त्रों में जया लक्ष्मी भी कहकर संबोधित किया गया है। विजयालक्ष्मी को जीत का प्रतीक माना जाता है। विजयालक्ष्मी स्वरुप में देवी का वर्ण गुलाबी आभा लिए हुए है, महादेवी लाल वस्त्रों से सुसज्जित हैं, उनके देह पर सुसज्जित हीरे, मोती व रत्नजड़ित स्वर्णभूषण अपनी शोभा बढ़ाते हैं। विजयालक्ष्मी पद्मासना हैं अर्थात ये कमल के फूल पर विराजमान हैं। इनकी आठ भुजाओं में क्रमश: चक्र, शंख, कमल, तलवार, भाल, ढाल व एक हाथ अभय व दूसरा वर मुद्रा में है। देवी विजयालक्ष्मी के विशेष पूजन व उपाय से हर क्षेत्र में जीत मिलती है, दारिद्र्य दूर होता है तथा व्यक्ति दुखों से मुक्ति पाता है।



पूजन विधि: संध्या के समय में ईशान मुखी होकर देवी विजयालक्ष्मी का विधिवत पंचोपचार पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन की अगरबत्ती जलाएं, गुलाब का फूल चढ़ाएं, अबीर चढ़ाएं, साबूदाने की खीर का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी सुहागन को दान दे दें।



पूजन मुहूर्त: शाम 18:00 से शाम 19:00 तक।

पूजन मंत्र: ॐ क्लीं कनकधारायै नमः॥



उपाय

दरिद्रता दूर करने हेतु देवी विजयालक्ष्मी का पूजन कर शंख बजाएं।



पारिवारिक दुखों से मुक्ति हेतु विजयालक्ष्मी पर चढ़े 4 कमलगट्टे किचन में छुपाकर रखें।



हर क्षेत्र में विजय पाने के लिए विजयालक्ष्मी पर चढ़ी कौड़ियां जलाकर जलप्रवाह कर दें।