नई दिल्ली। गोल्ड इम्पोर्ट को कम करने के लिए यूपीए सरकार द्वारा 5 साल पहले लाई गई 80:20 स्कीम अब उसके लिए गले की हड्डी बनती जा रही है। केंद्र की सत्ता में काबिज भाजपा यूपीए के तत्तकालीन वित्त मंत्री चिदंबरम पर आरोप लगा रही है कि उन्होंने नीरव मोदी-मेहुल चोकसी जैसे ज्वैलर्स को फायदा पहुंचाने के लिए स्कीम में बदलाव किया।

आरोपों की आंच कितनी दूर तक पहुंच रही है, उसे बीती रात पूर्व आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन के बयान से समझा जा सकता है। राजन ने स्कीम लाने के उद्देश्य पर सफाई देते हुए कहा है कि उस समय की इकोनॉमिक परिस्थितियों को देखते हुए स्कीम लाना जरुरी थी। हालांकि उनकी इस बात पर इत्तेफाक इकोनॉमिस्ट से लेकर ज्वैलरी इंडस्ट्री से जुड़े लोग पूरी तरह से नहीं रख रहे है। उनका कहना है कि स्कीम में जो आनन-फानन में  बदलाव किए, उससे कुछ खास लोगों को ही फायदा मिला। आइए आज की खास खबर की पड़ताल में उस दौर में क्या हुआ , उसे जानते हैं...

स्कीम लाने के पीछे की दलील

जब जुलाई 2013 में स्कीम लाई गई थी, उस समय रुपया डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो रहा था। जिसकी वजह से उसका लेवल 70 के करीब जा रहा था। सरकार की दलील थी, कि फेस्टिव सीजन में गोल्ड की डिमांड काफी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में उसका चालू खाता घाटा और बड़ेगा। उसे रोकने का तरीका यही है कि गोल्ड इम्पोर्ट में सख्ती की जाय। जिससे चालू खाता घाटा  पर कंट्रोल किया जा सका। अप्रैल-मई के दौरान उस समय करीब 770 अरब रुपए का गोल्ड इम्पोर्ट हुआ था। हालांकि कैग की 2016 में आई रिपोर्ट में स्कीम पर सवाल उठाए गए। जिसमें कहा गया कि स्कीम के जरिए एक लाख करोड़ रुपए का एक्सचेकर को नुकसान हुआ। स्कीम को नवंबर 2014 में केंद्र में नई आई एनडीए सरकार ने खत्म कर दिया था।

इकोनॉमिस्ट ने भी उठाए सवाल

इकोनॉमिस्ट मोहन गुरूस्वामी ने बताया कि स्कीम में जो मई 2014 में बदलाव किए गए, उससे साफ है कि उसका कुछ लोगों को फायदा मिला है। जिस बात को कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में उठाया है। उनके अनुसार स्कीम में इस तरह के बदलाव की कोई जरुरत नहीं थी। सरकार का कहना था कि वह चालू खाता घाटा कम करने के लिए यह स्कीम लेकर आई है। जिसमें टोटल इम्पोर्ट में से 20 फीसदी गोल्ड का ज्वैलरी के रुप में इम्पोर्ट करना जरुरी था। सरकार के इस कदम से कुछ लोगों के पास गोल्ड का कंट्रोल हो गया। वहीं एक पूर्व बैंक ने भी नाम न छापने की शर्त बताया कि गोल्ड इम्पोर्ट का लाइसेंस बड़े प्लेयर को मिला। ऐसे में उनकी मार्केट में मोनोपोली हो गई। जिसकी वजह से गोल्ड प्राइसिंग तय करने पर भी उनका अधिकार हो गया।

यूपीए सरकार ने सत्ता के जाते वक्त ऐन मौके पर स्कीम में किया बदलाव


अगस्त 2013 में जब चालू खाता घाटा को कंट्रोल करने के लिए 80:20 स्कीम लांच की गई थी। उस समय केवल, पब्लिक सेक्टर कंपनी एमएमटीसी और एसटीसी को स्कीम के जरिए गोल्ड इम्पोर्ट करने की सुविधा मिली थी। लेकिन जब मई 2014 में केंद्र में नई सरकार का आना तय हो गया था, उस समय यूपीए सरकार ने जाते-जाते स्कीम  में बदलाव किया। जिसके बाद प्रीमियम ट्रेडिंग हाउस और स्टार ट्रेडिंग हाउस को भी गोल्ड इम्पोर्ट करने की इजाजत दे दी। जिसके तहत 13 कंपनियों को यह सुविधा मिल गई। कैग ने अपनी रिपोर्ट यह सवाल उठाए है कि स्कीम में बदलाव करने से इन 13 कंपनियों को फायदा पहुंचा।

ज्वैलर्स शुरु से लगा रहे थे पक्षपात का आरोप

.ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि 80:20 से सबसे ज्यादा फायदा बड़े ज्वैलर्स को होता है जो गोल्ड इंपोर्ट करके ज्वैलरी एक्सपोर्ट करते हैं। घरेलू बाजार से गोल्ड खरीदने के की तुलना में गोल्ड इंपोर्ट सस्ता होता है। उस पर वैल्यू एडीशन कर एक्सपोर्ट करने पर ज्वैलर्स को काफी फायदा होता था लेकिन ये स्कीम बंद कर चुकी है क्योंकि इसका फायदा सिर्फ कुछ सेक्शन के ज्वैलर्स को हो रहा था।

.दरीबा के ज्वैलर्स तरुण गुप्ता ने बताया कि 80:20 का फायदा सिर्फ बड़े ज्वैलर्स को हो रहा था क्योंकि इसके लिए आपको सरकार की इजाजत लेनी होती है। ये स्कीम ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए फेवरेबल नहीं थी क्योंकि इसका बड़े ज्वैलर्स को कम प्राइस पर गोल्ड मिल रहा था जबकि छोटे ज्वैलर्स को घरेलू बाजार से महंगा गोल्ड खरीदना पड़ रहा था।