अयोध्या/फैजाबादः अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद का मामला देश का सबसे विवादित और पुराना मसला है, लेकिन जब इस मामले ने सियासी रंग बदला तो  मंदिर-मस्जिद की चौखट से निकलकर विवाद अदालत की दहलीज पर जा पहुंचा।सुप्रीम कोर्ट में इस विवादित मामले में आज यानि बुधवार से सुनवाई हुई। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला लिया है। 


सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सिर्फ मूल पक्षकारों को ही सुनने और असम्बद्ध व्यक्तियों के इसमें हस्तक्षेप करने के अनुरोधको अस्वीकार करने का आग्रह स्वीकार किया। न्यायालय ने अयोध्या में राम मंदिर में पूजा करने के मौलिक अधिकार को लागू करने के लिए स्वामी की निष्पादित याचिका बहाल करने का आदेश दिया।


इसके साथ ही न्यायालय ने मालिकानाहक विवाद के इस मामले में हस्तक्षेप के लिए भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी की अर्जी भी अस्वीकार की। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हस्तक्षेप के लिए सभी अंतरिम अर्जियां अस्वीकार कीं। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने तीनों हस्तक्षेप याचिकाओं को नामंजूर कर दिया। पीठ के अन्य 2 सदस्यों में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं।  


न्यायालय ने कहा कि पंजीयक इस मामले में कोई भी हस्तक्षेप याचिका स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 'मेरे मौलिक अधिकार मेरे संपत्ति के अधिकारों की तुलना में अधिक हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की अगली सुनवाई 23 मार्च को 2 बजे निर्धारित की है।