मध्यप्रदेश के मंडला जिले में फ्लोराइड प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर पीएचई विभाग द्वारा करोड़ों रुपये के घोटाला का मामला सामने आया है. दरअसल साल 2011 में जिले के 62 फ्लोराइड प्रभावित ग्रामों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से खैरी जलप्रदाय योजना की आधारशिला रखी गई थी. जलप्रदाय योजना का काम एक साल में पूरा हो जाना था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते शासन की यह अति महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है.


पीएचई विभाग द्वारा योजना की पूरी राशि खर्च कर ली है, लेकिन 6 साल गुजर जाने के बाद भी फ्लोराईड प्रभावित ग्रामों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. लिहाजा ग्रामीणों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है. जिससे ग्रामीण तरह तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.


हैरत की बात तो यह है कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष द्वारा जिला योजना समिति की बैठक में पीएचई विभाग द्वारा जलप्रदाय योजना के नाम किये गये भ्रष्टाचार के मामले को प्रमुखता से उठाया गया था. जिस पर संज्ञान लेते हुये जिले के प्रभारी मंत्री संजय पाठक ने जांच के आदेश दिये थे.

योजना में किये गये भ्रष्टाचार की जांच करने तीन अधिकारीयों की टीम भी बनाई गई थी, लेकिन एक साल गुजर जाने के बाद अब तक इस मामले की जांच शुरू नहीं हो पाई है. इस मामले में पीएचई विभाग के अधिकारी गोलमोल जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं.


फ्लोराइड प्रभावित गांव के लोग जिला प्रशासन के अधिकारीयों से कई शिकायत करने के बाद कोई कार्रवाई न होने के कारण काफी परेशान हैं. ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल की किल्लत होने के कारण उनके गांव में युवाओं की शादियां तक नहीं हो पा रही है.