नई दिल्ली. नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के 11 ए-320 विमानों की उड़ान पर रोक के बाद मंगलवार को इंडिगो और गोएयर काे देशभर में 65 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इनमें दिल्ली से उड़ने वाली 6 उड़ानें भी शामिल हैं। इन ए-320 नियो विमानों में प्रैट एंड ह्विटनी कंपनी के पीडब्ल्यू 1100 इंजन लगे हुए हैं। इन इंजनों में टेकऑफ से ठीक पहले या हवा में उड़ान के दौरान अपने-आप बंद हो जाने की शिकायत आ रही थी।


- डीजीसीए के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। बैन किए गए विमानों में से 8 इंडिगो एयरलाइंस और 3 गोएयर के हैं। इन विमानों में नए इंजन लगने तक मुसाफिरों की परेशानियां जारी रहेंगी। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें कितना समय लगेगा।


- अनुमान के तहत दोनों एयरलाइंस की उड़ान रद्द होने की वजह से रोजाना करीब दस हजार से अधिक मुसाफिरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विमानन क्षेत्र से जुडे वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार डीजीसीए ने जिन 11 विमानों को ग्राउंड किया है, उसमें 8 इंडिगो और 3 गो एयरवेज के हैं।


फैसला इसलिए : 20 दिन के भीतर तीन विमानों में उड़ान भरने के बाद हवा में बंद हुआ इंजन


- सोमवार को भी अहमदाबाद से लखनऊ के लिए उड़ान भरने वाले इंडिगो के एक विमान का इंजन हवा में बंद हो गया था। इसके बाद विमान को आपात स्थिति में वापस अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतारना पड़ा। 24 फरवरी को गोएयर के विमान का इंजन लेह से उड़ान भरने के बाद बंद हो गया था। इंडिगो के एक विमान का इंजन 5 मार्च को मुंबई से उड़ान भरने के बाद बंद हो गया था।


40 फीसदी यात्री रोज चुनतेे हैं इंडिगो की फ्लाइट


- डीजीसीए के आंकड़ों के अनुसार इंडिगो एयरलाइंस से रोजाना करीब 1.5 मुसाफिर सफर करते हैं। करीब 40 फीसदी यात्री हवाई यात्रा के लिए इंडिगो एयरलाइंस का चुनाव करते हैं। इसी तरह गो एयरवेज से रोजाना करीब 11 हजार लोग सफर करते हैं।


- 186 सीटों वाला ए-320 नियो एयरक्राफ्ट दिन में औसतन सात उड़ाने भरता है। इस लिहाज से एक विमान में प्रति दिन यात्रा के लिए 1302 सीटें उपलब्ध रहती हैं। जिसमें से यात्रा के दौरान विमान की 90 फीसदी सीटें भरी होती हैं।


- इस गणना के आधार पर प्रतिदिन इंडिगो के करीब नौ हजार और गो एयरवेज के करीब 3500 मुसाफिर यात्रा के लिए तैयार रहते हैं। विमानों के ग्राउंड होने के बाद इन 12500 मुसाफिरों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।


- एयरलाइंस सूत्रों के अनुसार अन्य विमानों में खाली पड़ी सीटों में रोजाना करीब 2500 लोगों को समायोजित किया जा रहा है। जिसके बाद करीब 10 हजार मुसाफिरों के पास अपनी टिकट रद्द कराकर दूसरी एयरलाइंस में मंहगी टिकट खरीदने या अपनी यात्रा रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।