हर चुनाव के पहले नेता किसान वोट बैंक हासिल करने के लिए लोकलुभावन वादे करते हैं. तमाम तरह की योजनाओं की घोषणा की जाती है, लेकिन हकीकत में किसान को कुछ नहीं मिलता है. खासकर मोदी सरकार पर यह आरोप लगते आए हैं कि सरकार किसानों से ज्यादा कॉर्पोरेट्स पर ध्यान दे रही है. शायद यही वजह है कि मोदी सरकार बनने के बाद से अब तक हर राज्य में किसान बड़े आंदोलन कर चुके हैं. आइए जानते हैं अब तक किन-किन राज्यों में हुए किसानों के आंदोलन...

महाराष्ट्र किसान आंदोलन: ताजा किसान आंदोलन महाराष्ट्र में हुआ. यहां 35 हजार से ज्यादा किसानों ने नासिक से लेकर मुंबई तक मार्च किया. महाराष्ट्र सरकार ने आखिरकार किसानों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया. किसानों ने कर्ज माफ़ी, आदिवासी वन जमीन अधिकार कानून 2006, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने जैसी मांगे रखी थीं.

मध्य प्रदेश किसान आंदोलन: जून 2017 में किसानों ने मध्य प्रदेश के मंदसौर में आंदोलन छेड़ा था. भीड़ को काबू करने के लिए हुई गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हो गई थी, जिसके बाद ये आंदोलन हिंसक हो उठा. कई जगह गाड़ियों और बसों में तोड़फोड़ हुई. आखिरकार शिवराज सरकार किसानों के आगे झुकी और प्याज को 8 रुपये प्रति किलो भाव देने का ऐलान किया. इसके अलावा कर्ज माफ़ी, फसलों के उचित मूल्य, सूखा पीड़ितों को मुआवजा देने का भी सरकार ने घोषणा की थी. 

तमिलनाडु के किसानों का प्रदर्शन: अप्रैल और जुलाई 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने नर खोपड़ी और चूहे मुंह में रखकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था. किसानों की मांग थी कि तमिलनाडु सरकार 2016 में सूखा पीड़ित किसानों के कर्ज माफ करने के अलावा वरदाह तूफ़ान से खराब हुई फसलों पर भी मुआवजा दे. पहले तो सरकार ने यह मांगे मानने से इनकार कर दिया था, लेकिन आखिरकार तमिलनाडु के सीएम ई पलानिस्वामी ने किसानों से मुलाकात कर रहत पैकेज की घोषणा की.

राजस्थान में किसानों का धरना प्रदर्शन: सितंबर 2017 में हजारों किसानों ने राजस्थान के शेखावाटी में कर्जमाफी, एमएसपी, किसान पेंशन योजना समेत 11 मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था. किसानों का कहना था कि बेमौसम बरसात और सूखा पड़ने के कारण उनकी 80 प्रतिशत फसल तबाह हो गई थी. किसानों ने 11 मांगों को लेकर आंदोलन किया. इसी दौरान झुंझुनू में पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया जिसमें एक किसान की मौत हो गई थी. गुस्साए किसानों ने नेशनल हाईवे ब्लॉक कर दिया था. कई दिनों तक दूध और सब्जियों की सप्लाई बंद की गई थी. जिससे शहरों में महंगाई आसमान छूने लगी. आखिरकार वसुंधरा सरकार को झुकना पड़ा और 20 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की गई.

आंध्र प्रदेश आंदोलन: मिर्च के दाम गिरने पर अप्रैल 2017 में किसानों ने मिर्च जलाकर प्रदर्शन किया था. उस वक्त मिर्च के दाम 15 से 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल होने के बजाय 5 से 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल थे. किसानों की मांग थी कि मिर्च की काला बाजारी के कारण भाव इतने कम हुए. इसलिए सरकार मिर्च खरीदने के लिए मध्यस्था करे ताकि किसानों को उचित भाव मिल सके. सरकार ने पहले तो किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दिया. बाद में यह आंदोलन हैदराबाद, एनुमानुला, कोथागुडेम, खम्मन के मिर्च बाजारों में उग्र हुआ. जगह-जगह प्रदर्शन हुए. आखिरकार सरकार ने मिर्च उगाने वाले किसानों के लिए लोन में राहत देने का ऐलान किया.

दिल्ली में किसान आंदोलन: नवंबर 2017 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिल नाडु समेत कई राज्यों के हजारों किसानों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया था.  ऑल इंडिया किसान संघर्ष समिति के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में 184 संगठन शामिल हुए थे. किसानों ने सरकार से कर्ज माफ़ी, फसल के उचित दाम, एमएसपी 1.5 गुना करने और सिंचाई की व्यवस्था करने जैसी मांग रखी थी. पहली बार इस आंदोलन में महिला किसानों ने प्रदर्शन किया. हालांकि, सरकार ने केवल आश्वासन दिया, लेकिन कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया. इस आंदोलन का नतीजा या रहा था कि देश भर में किसानों से जुड़ी समस्या बड़ा मुद्दा बन गया.