माकपा के किसान संगठन अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा नासिक से मुंबई तक निकाले गए मोर्चे के बाद दबाव में आई महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलनकारी किसानों की अधिकांश मांगें मान ली. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व किसानों के प्रतिनिधिमंडल के बीच 3 घंटे तक बैठक चली. सरकार के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ. सरकार का कहना है कि उन्होंने किसानों की 90 प्रतिशत मांगें मंजूर कर ली गई हैं. आइए जानते हैं उन मांगों के बारे में जिन पर राजी हुई महाराष्ट्र सरकार...

- आदिवासियों को वन जमीन अधिकार कानून के तहत जमीन के पट्टे देने का फैसला छह माह के अंदर किया जाएगा. आदिवासियों को 4 हेक्टेयर तक की जमीन का पट्टा दिया जाएगा.

- कृषि उत्पादों की लागत का डेढ़ गुना भाव देने के लिए सरकार पुख्ता कदम उठाएगी. साथ ही राज्य मूल्य आयोग की समिति में विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा. इसके अलावा 50 प्रतिशत अनाज नाफेड के माध्यम से खरीदा जाएगा.

- विदर्भ और मराठवाड़ा में कीड़े लगने से कपास और धान की फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई की राशि प्रदेश के सभी 1162 राजस्व मंडलों में वितरित की जाएगी. ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई भी तत्काल की जाएगी.

 - नदी जोड़ो परियोजना के तहत नार-पार और दमन गंगा पिंजाल नदी का पानी अहमदनगर और मराठवाड़ा में भेजने की व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा नासिक के सुरगाणा तहसील के 31 कोल्हापुर पद्धति के बांधों को नदी जोड़ो परियोजना में शामिल किया जाएगा.

- पुराने और फट चुके राशन कार्डों को छह महीने में बदला जाएगा. सरकार का कहना है कि आदिवासी इलाकों में यह काम तीन माह में पूरा होगा. आवंटित अनाज लाभार्थी को नहीं मिलने से जुड़ी शिकायतों का निपटारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी.

- किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत गन्ने की तर्ज पर 70-30 के फार्मूले के अनुसार निश्चित की जाएगी. इसके लिए राज्य सरकार की तरफ से जल्द बैठक बुलाई जाएगी. किसान चाहते हैं कि दूध का खरीद मूल्य 40 रुपए प्रति लीटर किया जाए.

- गौचर जमीन के अतिक्रमण को हटाकर जमीन आदिवासियों के नाम की जाएगी. देवस्थान इनाम की जमीन पर वर्षों से खेती करने वाले किसानों के नाम वह जमीन की जाएगी. सरकार इसके लिए खासतौर पर विधेयक भी लाएगी.

-संजय गांधी निराधार योजना के तहत लाभार्थियों को मिलने वाली 600 रुपए की राशि को बढ़ाने के बारे में सरकार दो महक भीतर फैसला करेगी. किसान सभा ने राशि को 2000 रुपए करने की मांग की है.