सम्भल। हलाला और बहुविवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता डॉ. समीना ने उक्त प्रथाओं को असंवैधानिक करार देने की गुहार लगाई गई है। गौरतलब है कि इससे पूर्व भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय भी ऐसी ही एक याचिका दायर कर चुके हैं। अश्वनी ने अपनी याचिका में कहा था कि हलाला और बहुविवाह मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।


रविवार को दैनिक जागरण से दिल्ली में मौजूद समीना ने मोबाइल फोन पर बात की तो फफक पड़ीं। समीना ने बताया कि 1999 में उनके पिता ने दिल्ली के जसौला विहार के एक परिवार में उम्रदराज व्यक्ति से शादी तय की थी। निकाह के बाद शौहर और ससुरालियों ने उत्पीड़न शुरू कर दिया। गर्भवती हुईं तो उन्हें सम्भल (उप्र) स्थित मायके भेज दिया जहां पुत्र को जन्म दिया। वह दोबारा गर्भवती हुई तो फिर शौहर ने उसे बेइज्जत कर घर से निकाल दिया। जून 2001 में मायके में ही दूसरे बेटे को जन्म दिया। दूसरे बेटे के जन्म के बाद शौहर ने तलाक दे दिया तो उसने केस कर दिया था।

समीना ने बताया कि तलाक देने के बाद जेठ ने बच्चों को पालने का विश्वास दिलाते हुए घर आने को कहा। इस पर वह घर चली गई, लेकिन जेठ भी उससे गलत काम करवाना चाहता था। इस पर उसने 2008 में ससुराल छोड़ दिया और दिल्ली के जबतोला में रहने लगी। जहां भरण-पोषण के लिए एक्यूप्रेशर थैरेपी की क्लीनिक खोली।


समीना ने बताया कि 2012 में दिल्ली में ही एक राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष से उसने दूसरा निकाह कर लिया, लेकिन कुछ समय बाद ही उसने फोन पर तीन तलाक दे दिया। उस समय भी वह गर्भ से थी। तलाक के 15 दिन बाद ही उसने तीसरे बेटे को जन्म दिया था।

समीना ने अपनी दादी और खुद के साथ हुई आपबीती के बाद तीन तलाक और हलाला के खिलाफ आवाज उठाई। मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने का संकल्प उठाया। समीना का कहना है कि दादी से छिपा कर दादाजी ने दूसरी शादी कर ली थी। फिर जब उसका निकाह और हलाला हुआ तो उसने मुस्लिम महिलाओं के हित में आवाज उठाई। मिशन तलाक के नाम से मुहिम शुरू की।