नई दिल्ली  जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने पर फैसला नहीं हो पाने के चलते कारोबारियों को समरी सेल्स रिटर्न वाला जीएसटीआर 3बी फॉर्म जून तक भरना होगा। फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने रिटर्न फाइलिंग के दो तरीकों के बारे में चर्चा की है।

क्या है इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल 

राज्य के अंदर ही स्टॉक ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा, जबकि एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल को 1 जून 2018 तक पूरे देश में लागू करने का प्लान है। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल तीन राज्यों केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में 15 अप्रैल से लागू होगा और इसके बाद अन्य राज्यों में लागू किया जाएगा। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 4 राज्यों के लॉट में लागू किया जाएगा। 


ई-वे बिल के मायने 

ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपये से ज्यादा के अमाउंट के प्रॉडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपॉर्टेशन या डिलिवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जेनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा। यह वैलिडिटी प्रॉडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा। 


क्या है रिवर्स चार्ज 

जीएसटी काउंसिल ने रिवर्स चार्ज मेकनिजम, टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (टीडीएस), टीसीएस को 1 जुलाई तक टाल दिया है। जीएसटी में अनरजिस्टर्ड डीलर से प्रॉडक्ट या नॉन रजिस्टर जॉब वर्कर से सर्विस लेने पर रिवर्स चार्ज लगने का प्रावधान है। यानी, अनरजिस्टर्ड डीलर से सर्विस या प्रॉडक्ट लेने पर आपको टैक्स देना होगा। जैसे जीसएटी रजिस्टर्ड डीलर अगर किसी अनरजिस्टर्ड डीलर से कोई प्रॉडक्ट या सर्विस लेता है तो उसे रिवर्स चार्ज चुकाना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि अनरजिस्टर्ड डीलर जीएसटी के दायरे से बाहर है। हालांकि रजिस्टर्ड डीलर को बाद में दिए गए टैक्स का रिफंड मिल जाएगा।