धार्मिक पुराणों में मानव व उसके जीवन संबंधित कई बातें बताई गई हैं। उन्हीं में से एक में मानव के जुड़ी बहुत बातों का वर्णन मिलता है। इसमें मनुष्य के दाएं यानी सीधे हाथ में 5 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया, जो बहुत खस मानी जाती हैं। धर्म ग्रंथों में इन्हें 5 तीर्थ कहा गया है। इन तीर्थों से ही मनुष्य देवताओं, पितृ व ऋषियों को जल चढ़ाते हैं। 



आईए जानें भगवान पर जल चढ़ाने के कुछ उपाय जिनसे प्रसन्न होकर भगवान दुर्भाग्य दूर करते हैं। वहीं पितृतीर्थ से जल चढ़ाने पर पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी प्रकार दाएं हाथ की हथेली पर 3 अन्य तीर्थ भी बताए गए हैं, जो विभिन्न धार्मिक कामों के लिए नियत हैं।



देवतीर्थ

इस तीर्थ का स्थान चारों उंगलियों के ऊपरी हिस्से में होता है। इस तीर्थ से ही देवताओं को जल अर्पित करने का विधान है। ऐसा करने से भगवान की कृपा बनी रहती है और बुरा समय यानी दुर्भाग्य दूर होता है।


पितृतीर्थ

तर्जनी (पहली उंगली) और अंगूठे के बीच के स्थान को पितृतीर्थ कहते हैं। इससे पितरों को जल अर्पित किए जाने का विधान है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।



ब्राह्मतीर्थ

हथेली के निचले हिस्से (मणिबंध) में ब्राह्मतीर्थ होता है। इस तीर्थ से आचमन ( शरीर शुद्धि के लिए पानी पीना) किया जाता है।



सौम्यतीर्थ

यह स्थान हथेली के बीचों-बीच होता है। भगवान का प्रसाद व चरणामृत इसी तीर्थ पर लेते हैं व यहीं से ग्रहण भी करते हैं।



ऋषितीर्थ

कनिष्ठा (छोटी उंगली) के नीचे वाला हिस्सा ऋषितीर्थ कहलाता है। विवाह के समय हस्तमिलाप इसी तीर्थ से किया जाता है।