रविवार दि॰ 11.03.18 कृष्ण दशमी पूर्व आषाढ़ नक्षत्र, वाणिज्यकरण व व्यतिपात योग है। पंचांग पूर्णिमांत प्रणाली के अनुसार वर्तमान में चैत्र माह है व अमान्त पद्धति के अनुसार वर्तमान में फाल्गुन है। फाल्गुन में सूर्य कुंभ व चैत्र में मीन राशि को भोगते हैं। इसी माह बुधवार दी॰ 14.03.18 को शाम 18:24 पर मीन संक्रांति के साथ सूर्य मीन में प्रवेश करेंगे। मीन मास को मल मास भी कहते हैं जिसमें सभी शुभ मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। ऐसे में रविवार को सूर्य पूजन श्रेष्ठ रहेगा। चैत्र के महीने में आदित्य को विवास्-वान् के रूप में पूजा जाता है व फाल्गुन में इन्हें मार्तण्ड कहा गया है। वैदिक मतानुसार सूर्यदेव समस्त जगत की आत्मा हैं। यही सृष्टि के आदि कारण भी हैं। यही एकमात्र प्रत्यक्ष देव हैं। 



पौराणिक मतानुसार सूर्य महर्षि कश्यप व माता अदिति के पुत्र हैं। भविष्य, मत्स्य, पद्म, ब्रह्म, मार्कण्डेय व सांब आदि पुराणों में सूर्य परिवार का विवरण है। इनकी पहली पत्नी विश्वकर्मा पुत्री संज्ञा व दूसरी पत्नी छाया है। अश्विनीकुमार, वैवस्वत-मनु, यमराज, यमुना, शनि, सावर्णि-मनु, तपती इनकी संताने हैं। कपिराज सुग्रीव व कर्ण इनके अंश से उत्पन्न हुए थे। मार्तण्ड रूप में सूर्य ही शिव के एक नेत्र व विवास्-वान् रूप में भगवान विराट के नेत्र को अभिव्यक्त करते है। 



ज्योतिषशास्त्र के काल-पुरुष सिद्धांतानुसार सूर्य को आदत, पेट, गर्भ, शिक्षा, संतान, ज्ञान और दृष्टि का स्वामी माना गया है। सूर्य के विशिष्ट पूजन व उपाय से मानसिक एकाग्रता में वृद्धि होती है, पेट के विकारों का शमन होता है, पैतृक संपत्ति से लाभ मिलता है।  



पूजन विधि: प्रातःकाल सूर्यदेव का विधिवत पूजन करें। सिंदूर युक्त गौघृत से दीप करें, गूगल धूप करें, हल्दी चढ़ाएं। पीले व लाल फूल चढ़ाएं। किशमिश का फलाहार चढ़ाएं। जलेबी का भोग लगाएं, तथा लाल चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन उपरांत फलाहार व भोग लाल गाय को खिलाएं।



पूजन मुहूर्त: प्रातः 09:50 से प्रातः 10:50 तक। 

पूजन मंत्र: ह्रीं विवस्वते नमः॥



उपाय

पेट के विकारों के शमन हेतु सूर्य पर चढ़े अनारदाने का सेवन करें।



पैतृक संपत्ति में लाभ हेतु सूर्यदेव पर चढ़े 4 जायफल जलप्रवाह करें।



मानसिक एकाग्रता में वृद्धि हेतु सूर्यदेव पर चढ़ी हल्दी से नित्य तिलक करें।