आज के इस मार्डेन समय में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरूषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलती है। आज के समय में बहुत सी इंडिपेंडेंट महिलाएं खुद के पैरों पर खड़े होने के लिए जॉब करती है लेकिन बहुत सी जगहों पर महिलाओं को पुरूषों के मुकाबले कम सैलरी दी जाती है। मगर आज हम आपको एक ऐसे यूरोपीय देश के बारे में बताने जा रहें ह, जिन्होंने महिलाओं की सैलरी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है।

आइसलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां महिलाओं को पुरूषों के मुकाबले अधिक सैलरी देने का फैसला किया गया है। आइसलैंड की सरकार ने वुमन्स डे के मौके पर महिलाओं के लिए यह नया कानून लागू किया है कि उन्हें पुरूषों से अधिक सैलरी दी जाएगी। इसी कारण आइसलैंड शहर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की लिस्ट में महिलाओं के अधिकारों का ख्याल रखने के मामले में टॉप पर है।

आइसलैंड के कानून के मुताबिक अगर महिलाओं की सैलरी में किसी भी तरह का अंतर पाया गया तो उस कंपनी पर जुर्माना लगा दिया जाएगा। इसके अलावा सभी प्राइवेट और सरकारी कंपनियों 25 या इससे अचाधिक कर्मरियों की बराबर सैलरी के कागजात भी रखने होंगे।

आइसलैंड में यह कदम लिंग के आधार पर सैलरी में भेदभाव को खत्म करने के लिए उठाया है। यूरोप और यूके में पुरुषों के महिलाओं की सैलरी में 16.9 प्रतिशत का अंतर है और भारत में 25 प्रतिशत का। भारत में 66 फीसदी महिलाओं को काम के बदले कुछ नहीं मिलता, जबकि इस मामले में पुरुषों की संख्या केवल 12 प्रतिशत है।