नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद परोक्ष कर संग्रह में अपेक्षानुरूप वृद्धि न होते देख सरकार अब खजाना भरने के लिए अतिरिक्त उपाय करने में जुट गयी है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्र शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रयास कर रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में शनिवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में ईएनए पर जीएसटी लगाने पर विचार किया जा सकता है। काउंसिल में अगर इस प्रस्ताव पर आम राय बनी तो ईएनए पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जा सकता है।


फिलहाल ‘मानव उपभोग के लिए अल्कोहल’ (शराब) जीएसटी के दायरे से बाहर है लेकिन औद्योगिक अल्कोहल पर जीएसटी लगता है। हालांकि ईएनए के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है और इस पर राज्य सरकारें वैट लगाती हैं। ईएनए का इस्तेमाल शराब बनाने के लिए तथा फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्री में होता है। इसलिए केंद्र की दलील है कि ईएनए पर जीएसटी लगाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र ने इस मुद्दे पर कानूनी राय ली है और विशेषज्ञों का कहना है कि ईएनए शराब नहीं हैं, इसलिए इस पर जीएसटी लगाया जा सकता है।

‘मानव उपभोग के लिए अल्कोहल’ जीएसटी के दायरे से बाहर है और संविधान संशोधन में इसका स्पष्ट उल्लेख है। शराब पर राज्य सरकारें वैट और आबकारी शुल्क वसूल रहे हैं और काफी राजस्व अर्जित करती हैं। इसलिए उन्हें ईएनए पर जीएसटी लगाने को लेकर एतराज भी है। सूत्रों के मुताबिक राज्यों की चिंता यह है कि अगर ईएनए पर जीएसटी लग जाता है तो यह शराब को भी जीएसटी के दायरे में लाने का आधार बन सकता है। हालांकि शराब पर जीएसटी लगाने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता भी पड़ेगी। बहरहाल इतना तय है कि ईएनए पर अगर जीएसटी लगता है तो यह शराब को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में एक कदम होगा।


वैसे सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब जीएसटी लागू होने के बाद परोक्ष कर संग्रह में अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हुई है। एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ और शुरुआती दो महीनों को छोड़ दें तो लगातार ही जीएसटी संग्रह में गिरावट दर्ज की गयी है। जनवरी 2018 में जीएसटी संग्रह 86,318 करोड़ रुपये रहा जो दिसंबर में वसूले गए जीएसटी 86,703 करोड़ रुपये के मुकाबले कम है। यही वजह है कि सरकार ने परोक्ष कर राजस्व बढ़ाने के लिए कई और उपाय भी किए हैं। मसलन, कई महीनों से ठंडे बस्ते में पड़े ई-वे बिल को लागू करने की दिशा में भी जीएसटी काउंसिल ने कदम उठाया है। माना जा रहा है कि ई-वे बिल के लागू होने से कर चोरी रुकेगी जिससे खजाना भरेगा।