मध्यप्रदेश में गुरुवार को महिला दिवस के उपलक्ष्य में जहां जगह-जगह महिलाओं के सम्मान में कार्यक्रम हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं भी जिनकी नजरों में ये सम्मान समारोह महज सरकारी औपचारिकताएं हैं. ये कहना है स्वास्थ सेवाओं में महती ज़िम्मेदारी निभाने वाली उन आशा कार्यकर्ताओं का जो कि नियमितीकरण और समान वेतन की मांग को लेकर ग्वालियर में बुधवार रात से धरने पर बैठी हैं.


फूल बाग इलाके में इन आशा और शहरी ऊषा कार्यकर्ताओं ने 72 घंटे का धरना शुरू किया है. धरना दे रही आशा एवं कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह प्रसूताओं की डिलेवरी के लिए रात दिन-ड्यूटी करनी पड़ती है.


इसके साथ ही स्वास्थ विभाग के टीकाकरण, पोलियो सहित तमाम अभियानों में हम पूरी जिम्मेदारी और मेहनत से काम करती हैं.  इसके बावजूद भी  सरकार न तो नियमितीकरण कर रही है न ही उचित वेतनमान दे रही है.


आशा कार्यकर्ताओं माधवी सिंह ने कहा कि रात से धरने पर बैठे हैं हमारी मांग मानना तो दूर अब तक हमसे बात करने तक के लिए कोई सरकारी मुलाजिम नहीं आया. इससे पहले भी कई बार सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाई लेकिन सरकार ने अब तक मांगों पर ध्यान नहीं दिया. यही वजह है कि मजबूर होकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर धरने पर बैठना पड़ा. यह धरना लगातार 72 घंटे तक चलेगा.