सोमवार दि॰ 05.03.18 को चैत्र कृष्ण चतुर्थी के उपलक्ष्य में चैत्र संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। कृष्ण पक्ष को आने वाली चौथ को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। चैत्र संकष्टी चतुर्थी को गणेश जी के विकट स्वरूप का पूजन करने का विधान है। भगवान श्री गणेश का षष्टम अवतार विकट है जिसका वाहन मयूर है। विकटावतार सौरब्रह्म का धारक है, इस अवतार में गणेश जी ने कामासुर का अंत किया था। चैत्र संकष्टी चतुर्थी में राजा मकरध्वज की कथा कही और सुनी जाती है। इसमें घी व बिजौरे नीबू से पूजन किया जाता है। पौराणिक मतानुसार कालांतर में संकटों से घिरे देवगण साहयता हेतु महेश्वर के पास गए। इसपर महेश्वर ने कार्तिकेय व गणेश की श्रेष्ठता के आधार पर किसी एक को देवताओं के संकट हरने को कहा व साथ ही अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु सर्वप्रथम पृथ्वी की परिक्रमा करने का आधार रखा। कार्तिकेय मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा हेतु निकल गए। परंतु गणपति की सवारी मूषक थी जिससे वो जीत नहीं सकते थे। इसी कारण गणेश जी ने अपने माता-पिता अर्थात शिव-पार्वती की सप्त परिक्रमा करके यह विजय प्राप्त की व देवगणों के संकट दूर किए। महेश्वर ने गणपति को आशीर्वाद दिया की चतुर्थी पर जो व्यक्ति गणेश पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके तीनों ताप अर्थात दैहिक, दैविक व भौतिक ताप दूर होंगे। चैत्र संकष्टी चतुर्थी के विशेष व्रत, पूजन व उपाय से संकटों का नाश होता है, सांसरिक समस्याओं का समाधान होता है व नि:संतानों को संतान की प्राप्ति होती है। 


विशेष पूजन विधि: घर की उत्तर दिशा में गणपति का चित्र स्थापित करके विधिवत पूजन करें। चौमुखी गौघृत का दीप करें, चंदन से धूप करें, सफेद फूल चढ़ाएं, चंदन से तिलक करें, दूर्वा चढ़ाएं, ऋतुफल चढ़ाएं व मोदक का भोग लगाएं तथा किसी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद मोदक प्रसाद स्वरूप बांट दें।



गणेश पूजन मुहूर्त: रात 21:16 से रात 22:16 तक। 



चंद्र पूजन मुहूर्त: रात 21:48 से रात 22:48 तक।


 


उपाय

संकटों के नाश हेतु गणपति पर गौघृत से अभिषेक करें। 


पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति हेतु चंदन चढ़ी सुपारी गणपति पर चढ़ाएं।


संतान की प्राप्ति हेतु नींबू 4 बार नाभि से वारकर गणपति पर चढ़ाएं।