वास्तु के अनुसार कुछ एेसे पौधों को घर में रखने से काफी नुकसान व मसीबतों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं इन पौधों को रखने से पहले सही दिशा का चयन करना भी अति आवश्यक माना जाता है। आईए जानें इसके बारे में-



घर की दक्षिण दिशा में गुलमोहर, पाकड़, कटहल के वृक्ष लगाने से अकारण शत्रुता, अर्थनाश, असंतोष व कलह होने की संभावना रहती है। इस दिशा में नीम, नारियल, अशोक के वृक्ष लगाना शुभ होता है।  



घर के परिसर में गुलाब, तुलसी, चमेली, बेला आदि लगाना शुभ होता है। इससे शत्रुनाश, धनसंपदा की वृद्धि व संतति सुख प्राप्त होता है।



जिन पेड़ों से गोंद निकलता हो अर्थात चीड़ आदि घर के परिसर में नहीं लगाने चाहिएं। यह धन हानि की संभावना को बढ़ाता है।



दक्षिण पूर्व दिशा अर्थात आग्नेय कोण की ओर पलाश, जवाकुसुम, बरगद, लाल गुलाब अशुभ एवं कष्टदायक होते हैं। इस दिशा में लाल फूलों के वृक्षों व लताएं तथा कांटे वाले वृक्ष अनिष्टकारक एवं मृत्युकारक माने गए हैं।



घर की पूर्व दिशा में गुलाब, चंपा, चमेली, बेला, तुलसी आदि के पौधे लगाने चाहिएं। इस दिशा में दूब (दुर्वा) लगाना शुभ माना जाता है।



घर की पूर्व दिशा की ओर पीपल और बरगद के वृक्ष लगाने शुभ नहीं होते। इनसे स्वास्थ्य हानि, प्रतिष्ठा में कमी एवं अपकीर्ति के संकेत मिलते हैं।



घर के परिसर में केला, नींबू, कदंब अथवा कैक्ट्स के पेड़ अनिष्ट के द्योतक हैं।


अगर गृह परिसर में अशुभ वृक्ष लगे हों तो उन्हें हटवा देना चाहिए पर यदि यह संभव न हो तो भवन और वृक्षों के बीच अशोक के पेड़ लगा देने से अशुभ प्रभाव कुछ सीमा तक कम हो जाते हैं। अशोक के वृक्ष अशुभ प्रभाव को नष्ट करने वाले होते हैं।



भूखंड के केवल दक्षिण दिशा में वृक्षारोपण करना उचित व शुभ नहीं होता। भवन के सम्मुख नीम,बबूल,बेल के वृक्ष नहीं लगाने चाहिएं। इन्हें भवन के पीछे कुछ दूरी छोड़कर लगाया जाना चाहिए।