ग्वालियर। कलेक्टर ने जिले में एलपीजी गैस किट लगी मारूति वैनों को स्कूल के बच्चों को लाने व ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अगर एलपीजी वैन बच्चों का परिवहन करते पकड़ी गई तो इसके लिए स्कूल प्रबंधन व वैन मालिक जिम्मेदार होंगे।


साथ ही आदेश के उल्लंघन के मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर निर्देश दिए गए हैं कि उप पुलिस अधीक्षक यातायात, आरटीओ व जिला शिक्षा अधिकारी वैनों पर अलग-अलग कार्रवाई करें।


16 फरवरी 2018 को रायसिंह के बाग में एक स्कूली वैन में आग लग गई थी। इस वैन में 11 बच्चे सवार थे, आग लगने के बाद ड्राइवर वैन छोड़कर भाग गया था। तभी मौके पर मौजूद दो युवकों की मदद से वैन से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।


वैन में इंजन के पास से गैस का रिसाव हो रहा था, जिससे वैन के अंदर आग भड़क गई थी। इस घटना के बाद स्कूली वैनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी एसपीएस चौहान ने एक प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा, जिसमें स्कूल वैनों में एलपीजी किट को प्रतिबंधित करने की बात कही गई थी। कलेक्टर ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।


शहर में 405 मारूति वैन एलपीजी से दौड़ रहीं


शहर में 405 मारूति वैन रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 208 में ईधन के रूप में एलपीजी गैस का उपयोग किया जा रहा है। ये वैन निजी उपयोग के लिए रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इन वैनों में स्कूल के बच्चों का परिवहन हो रहा है। बच्चों के लिए ये वैनें सुरक्षित नहीं हैं।


- कलेक्टर ने अपने आदेश में कहा कि जिले के समस्त सीबीएसई, आईसीएसई से संबंद्ध स्कूल, माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूल, शासकीय व अर्ध शासकीय स्कूल सुनिश्चित करें कि उनके स्कूल में अध्ययनरत छात्रों का परिवहन एलपीजी गैस किट लगे वाहन से तो नहीं हो रहा है। इस आदेश का पालन कराने के लिए स्कूलों को 15 दिन का समय दिया जाता है।


- जिन स्कूलों में एलपीजी किट लगे वाहनों से बच्चों का परिवहन हो रहा है, वह स्कूल संचालक 13 मार्च से पहले अन्य वाहन की व्यवस्था कराएं।


गैस किट मिली थी जर्जर हालत में


रायसिंह के बाग में हुई घटना के बाद खाद्य विभाग व आरटीओ ने संयुक्त अभियान चलाया। जिसमें वैनों में लगी गैस किट की जांच की गई। जिसमें सामने आया कि किटें काफी जर्जर हालत में हैं। इनसे कभी हादसा हो सकता है। इसके चलते किटों को प्रतिबंधित किया गया है।