बुधवार दि॰ 28.02.18 फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी के उपलक्ष्य में बुध प्रदोष पर्व मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि परमेश्वर शिव को समर्पित है। त्रयोदशी सभी दोषों का नाश करती है अतः इसे प्रदोष कहते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार त्रयोदशी के स्वामी कामदेव हैं व इसके अमृत कला का पान कुबेर करते हैं। इस तिथि का विशेषण जयकरा है। त्रयोदशी की दिशा दक्षिण है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन समस्त देवी-देवता, दैत्य, सर्व दिव्य आत्माएं अपने सूक्ष्म स्वरूप में शिवलिंग में समा जाती हैं। 



स्कन्द पुराण के अनुसार कालांतर में शांडिल्य व ब्राह्मणी संवाद के अंतर्गत ब्राह्मणी अपने पुत्र सुचिव्रत व अनाथ राजकुमार धर्मगुप्त को उनके पास लेकर आई। मुनि के निर्देशानुसार उस ब्राह्मणी व दोनों बालको ने प्रदोष व्रत का पालन किया। आठवें प्रदोष को सुचिव्रत को अमृत कलश व धर्मगुप्त को उसका खोया राज्य प्राप्त हुआ। शास्त्रनुसार इस दिन शिवालय में शिवलिंग के दर्शन मात्र से अनेकों जन्मो के पाप ताप नष्ट होते हैं व सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन प्रदोष काल में शिवालय में बिल्वपत्र चढ़ाकर दीप जलाने से अनेको पुण्यो की प्राप्ति होती है। 



गर्गसंहिता के अनुसार त्रयोदशी पर निरन्तरता के साथ शिव व कामदेव के पूजन से शीघ्र अविवाहितों का विवाह होता है व व्यक्ति रूपवान व तेजस्वी बनता है। प्रदोष का पूजन वार के अनुसार करने का शास्त्रों में विधान है। महर्षि सूत अनुसार बुधवार प्रदोष के व्रत, पूजन और उपाय से सभी प्रकार की कामना सिद्ध होती है, महेश्वर से मुंह मांगा फल मिलता है, पराक्रम में वृद्धि होती है व कार्यों में आ रही अड़चने दूर होती है। 


 

विशेष पूजन विधि: शिवालय जाकर शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, बिल्वपत्र चढ़ाएं, दूर्वा चढ़ाएं, चंदन चढ़ाएं, पिस्ता की बर्फी का भोग लगाएं, हरे गोल फल (मौसमी) चढ़ाएं, इलायची व मिश्री चढ़ाएं तथा रुद्राक्ष माला से इन विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें।


पूजन मुहूर्त: शाम 17:45 से शाम 18:45 तक।


पूजन मंत्र: ब्रीं बलवीराय नमः शिवाय ब्रीं॥



उपाय

पराक्रम में वृद्धि हेतु शिवलिंग पर चढ़ा सूखा धनिया कर्पूर से जलाएं।



सर्व कामना सिद्धि हेतु शिवलिंग पर चढ़ी इलायची किचन में रखें।



अड़चने दूर करने हेतु शिवलिंग पर मिश्री के जल से अभिषेक करें।