लाल किताब के अनुसार कोई भी कुंडली यह बतलाती है कि गृह स्वामी के घर में रसोईघर, शयन कक्ष, पूजा गृह एवं शौचालय आदि कहां पर बने हैं। इनमें से जो भी स्थान अपनी निर्धारित जगह पर न हो, तो उसे बदल कर निर्धारित स्थान पर करा देने से या उनमें ही थोड़े से परिवर्तन से भी बहुत-सी समस्याओं का निदान हो जाता है। 



सोना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। शरीर में सिर की स्थिति उत्तरी ध्रुव एवं पैरों की स्थिति दक्षिणी ध्रुव मानी गई है। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में एक जैसे दो ध्रुवों को पास लाने से विकर्षण एवं विपरीत ध्रुवों को पास लाने से आकर्षण होता है, इसीलिए उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने वाले लोग अनिद्रा, मानसिक तनाव, अपच, कुंठा के शिकार होते हैं, इसलिए उत्तर की तरफ सिर करके सोना मना किया गया है। उत्तर की तरफ सोने से सुचारू रूप से रक्त प्रवाह न होने से मानसिक विकलांगता भी आती है, अत: विकलांगता की रोकथाम उत्तर की तरफ सिर करके न सोने से हो सकती है।



दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके सोने से पूरे शरीर का चुंबकीय सर्किट सुचारू रूप से होता है और रक्त प्रवाह में बाधा नहीं होती। दीर्घायु होने के लिए दक्षिण-पश्चिम एवं पूर्व की तरफ सिर करके सोना चाहिए जिससे जातक तनावमुक्त एवं प्रसन्नचित रहेगा और उसके मानसिक कष्ट भी दूर होंगे, इसलिए शयन कक्ष पर विस्तार से प्रकाश डालना आवश्यक है।



शयन कक्ष के कारक ग्रह मंगल एवं शुक्र हैं। मंगल पुरुष का तथा शुक्र ग्रह महिला का कारक है। पति-पत्नी (पुरुष एवं महिला) के प्रयोग के लिए शयन कक्ष ही उचित स्थान है। दम्पति में कलह हो तो देखें कि यदि पत्नी की तरफ से शुरूआत हो तो शुक्र की गड़बड़ी होगी और यदि पति की तरफ से कलह प्रारंभ हो तो मंगल की गड़बड़ी होगी क्योंकि शयन कक्ष में मंगल एवं शुक्र की शक्ति बराबर ही रहनी चाहिए तभी दाम्पत्य जीवन का सुखद एवं सही उपयोग हो सकता है।



शुक्र की गड़बड़ी को दूर करने के लिए दीवारों पर आकर्षक गुलाबी रंग के पेंट की पुताई कराएं तथा सुंदर चित्र एवं अच्छी पेंटिंग टांगें। पर्दे हल्के गुलाबी रंग के सुगंध से युक्त हों, बेशक इत्र की, सैट की या देशी गुलाब, चंपा, चमेली, बेला आदि की सुगंध हो या रात रानी की सुगंध। पलंग की चादर सफेद अथवा गुलाबी रंग की हो। गद्दा एवं तकिए मुलायम खुशनुमा रंग के हों तथा हल्का संगीत, धीमा प्रकाश शयन कक्ष में मुहैया करें, तो कठोर (क्रूर-कर्कश) बोलने वाली पत्नी के व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है।



यदि मंगल (पुरुष) की तरफ से गड़बड़ी हो तो उसे ठीक करने के लिए कमरे में लाल पेंट (रंग) कराएं। टी.वी. आदि इलैक्ट्रॉनिक वस्तुए शयन कक्ष में रखें। गद्दे, तकिए हल्के से कठोर हों तो बेहतर (शुभ) होगा। दीवारों पर तांबे की धातु के बने सजावट के सामान लगाएं। नक्काशीदार शोपीस धातु के रखें, गुलाबी या लाल रंग के नाइट लैंप लगाएं तथा गर्म दूध का सेवन करें। सर्दियों में हीटर का इस्तेमाल करें और सर्दियों के बाद इस्तेमाल न करते हुए भी हीटर शयन कक्ष में रखें। इससे कितने भी उग्र स्वभाव का पति हो, वह भी वश में हो जाता है। नवदंपति अथवा पच्चीस साल पहले के शादी-शुदा दम्पति, वे अपनी यौन संबंधी विसंगतियां दूर कर सकते हैं।



मकान में बाएं हाथ पर पडऩे वाली खिड़कियां पत्नी, मां, बेटियों, बहनों का कारक बनती हैं, इसलिए मकान के बाएं हाथ की खिड़कियां ठीक हालत में होनी चाहिएं।



शयन कक्ष के बाएं हाथ पर पडऩे वाली खिड़की का प्लास्टर आदि टूटा हो (उखड़ा हो), सलाखें टूटी हों तो उसे तत्काल ठीक करना चाहिए, इससे दांपत्य जीवन में चिड़चिड़ापन दूर होगा। मकान की बाएं हाथ की तरफ की सभी खिड़कियों को अप-टू-डेट (ठीक) रखें, इससे माता, पत्नी, बेटियों, बहनों से विवाद की संभावनाएं न्यूनतम हो जाएंगी।



शयन कक्ष का फर्श संगमरमर (मार्बल) अथवा साफ चिकने पत्थरों का या प्लास्टर का हो तो पति-पत्नी में संबंध मधुर रहेंगे। फर्श का प्लास्टर या पत्थर टूटा-फूटा होगा तो पति-पत्नी में संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं।



बुध एवं शुक्र के प्रभाव से शयन कक्ष में बाहर के लोग आकर बैठक करें या गप्प मारें तो पत्नी चंचला होगी, पति-पत्नी एक-दूसरे पर शक करेंगे। यदि शयन कक्ष में या शयन कक्ष के साथ अथवा अंदर जल का स्रोत हो तो शुक्र, बुध के साथ चंद्र होने से पत्नी, बहन, बेटी में से एक का पर-पुरुष से संबंध बन सकता है। पति-पत्नी के भी दूसरी महिला या पुरुष से यौन संबंध बन सकते हैं।