कास्ट: कार्तिक आर्यन, नुसरत भरूचा, सनी सिंह, आलोक नाथ, दीपिका अमीन, विरेंद्र सक्सेना, आएशा रजा


डायरेक्टर: लव रंजन


कहानी : लव रंजन, राहुल मैडी


रेटिंग: **1/2 (ढाई स्टार)


'सोनू के टीटू की स्वीटी' फिल्म के साथ लव रंजन अपनी चौथी फिल्म के साथ ऑडियंस के सामने हैं. पिछली फिल्मों की ही तरह इस फिल्म में भी लव रंजन एक बार फिर लड़कियों को पूरी तरह गलत साबित करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं और इस बार भी लड़के बेचारे खुद को उनके चंगुल से बचाने की जुगत में दिखाई देते हैं. फिल्म में एक बार फिर फीमेल कैरेक्टर को निशाने पर रखते हुए कॉमेडी सीन्स और कहानी बुनी गई है. फिल्म की कहानी में कुछ नया नहीं है.फिल्म को देखते हुए आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि कहानी में आगे क्या होने जा रहा है. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी लव रंजन ने फिल्म में कॉमेडी का तड़का लगाया है. हालांकि कुछ बहुत सेक्सिस्ट जोक्स भी आपको दिखेंगे फिल्म में. फिल्म की स्टारकास्ट और निर्देशक दोनों ही खुद को रिपीट कर रहे हैं ऐसे में आपको कई बार ऐसे सीन्स दिखेंगे जिससे आपको 'प्यार का पंचनामा' सीरीज की याद आ जाएगी. फिल्म के अगर नाम को इग्नोर कर दिया जाए तो ये फिल्म भी  'प्यार का पंचनामा' की सीरीज का एक नया पार्ट है.


कहानी


आपको प्यार का पंचनामा में कार्तिक आर्यन की वो 5 मिनट की स्पीच तो याद ही होगी जिसमें वो एक सांस में ही लड़कियों की बुराई करते नजर आते हैं. इस फिल्म की शुरुआत भी कुछ उसी अंदाज में होती है. फिल्म की कहानी दो दोस्तों की है जो चड्डी-बड्डी फ्रैंड्स हैं. सोनू (कार्तिक आर्यन) और टीटू (सनी सिंह) के पेरेंट्स अच्छे दोस्त होते हैं लेकिन सोनू की मम्मी की मौत के बाद उसके पिता विदेश में जाकर बस जाते हैं और सोनू अपने दोस्त टीटू के ही घर पर पला बढ़ा है.फिल्म में टीटू को थोड़ा डंब और इमोश्नल फूल दिखाने की कोशिश की है तो वहीं सोनू थोड़ा स्मार्ट है और हर बार अपने दोस्त को लड़कियों के चंगुल से निकाल लेता है. स्वीटी (नुसरत भरूचा) की एंट्री से पहले सोनू, टीटू का ब्रेकअप करा चुका होता है और शादी करने की सलाह देता है... और एक अच्छे बच्चे की तरह टीटू उसकी बात मान भी लेता है. फिर एंट्री होती है सोनू के टीटू की स्वीटी की. स्वीटी एक दम भारतीय नारी की तरह परफेक्ट होती है और पहली बार में ही टीटू और उसके घरवालों का दिल जीत लेती है. लेकिन अपने दोस्त के लिए ओवर प्रोटेक्टिव सोनू को स्वीटी इतनी भी स्वीट नहीं लगती और उसमें कमियां निकालना शुरू करता है.


अफसोस सोनू की सारी कोशिशें नाकामयाब रहती हैं और टीटू-स्वीटी की शादी पक्की हो जाती है. जैसे ही टीटू की स्वीटी से सगाई हो जाती है तो स्वीटी खुद ही सोनू को आकर कहती है, 'हां हूं मैं चालू, जाओ बता दो सबको जाकर'. स्वीटी के इस कन्फेशन से शुरू होती है ब्रोमांस और रोमांस के बीच की लड़ाई. सोनू अपने दोस्त टीटू की शादी तुड़वाने के लिए सौ जुगत लगाता है इसमें उसे घसीटा राम (आलोक नाथ) टीटू के दादा और लालू (विरेंद्र सक्सेना) टीटू के मोहबोले नाना का साथ मिलता है, लेकिन शादी के दिन तक सोनू की सारी कोशिशें नाकामयाब हो जाती है. इस सब के बीच में कई ऐसे सीन्स आते हैं जो आपको हंसने पर मजबूर कर देंगे. 

शादी से ठीक एक दिन पहले स्वीटी एक बार फिर सोनू को चैलेंज करती है और कहती है 'लड़की और दोस्ती में जीत हमेशा लड़की की ही होती है'. शादी के दिन तक सोनू हार नहीं मानता और वरमाला से ठीक पहले ही स्टेज पर खड़ा सोनू एक ऐसा धमाका करता है कि बेचारा टीटू मुश्किल में पड़ जाता है कि उसे दोस्त चाहिए या बीवी. अब लड़की और दोस्ती में जीत किसकी होती है इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी.


फिल्म की कहानी का सबसे कमजोर पहलू ये है कि पूरी फिल्म की कहानी स्वीटी के किरदार के इर्द-गिर्द बुनी गई है और उसे झूठा और फेक साबित करने की कोशिश की जाती है. लेकिन फिल्म के अंत तक आपको ये बताया ही नहीं गया है कि आखिर वो बुरी है क्यों? क्या सिर्फ वो एक लड़की है इसीलिए वो बुरी हो जाती है?. फिल्म में इस बार लव रंजन ये ठीक ढंग से बता नहीं पाए कि आखिर दोस्ती और प्यार में चुनाव की जरूरत पड़ी ही क्यों है.

एक्टिंग


फिल्म में सबसे शॉकिंग रोल था संस्कारी आलोक नाथ का, इस फिल्म में वो बिल्कुल भी संस्कारी नजर नहीं आ रहे हैं. आलोक नाथ ने ये नॉट सो संस्कारी दादा का रोल बहुत ही बेहतरीन और मजेदार तरीके से दिखाया गया है. कार्तिक आर्यन और नुसरत भरूचा ने भी अपने कैरेक्टर को ठीक से निभाया है. लेकिन ये दोनों ही खुद को रिपीट कर रहे हैं जिसके चलते दोनों ही कुछ नया करते नजर नहीं आ रहे हैं. वहीं, फिल्म के टीटू यानी की सनी सिंह को अपने एक्टिंग स्किल्स पर थोड़ा और काम करने की जरूरत है. फिल्म में वैसे तो सनी का रोल छोटा है और डायलॉग भी कम हैं लेकिन जितना रोल उन्हें दिया गया है वो उसे भी बहुत अच्छे से नहीं कर पा रहे हैं.म्यूजिक


फिल्म के म्यूजिक की बात करें तो फिल्म के सारे ही गाने इस वक्त लोगों की जुबान पर हैं. फिल्म में कुल 8 गाने रखे गए हैं जिनमें से 'छोटे-छोटे पैग' और 'दिल चोरी साडा' दोनों ही गानों को हनी सिंह ने रिक्रिएट किया है. इसके अलावा 'बम डिगी बम' जो कि एक पंजाबी ट्रैक है उसे इस फिल्म में अडॉप्ट किया गया है. फिल्म का चौथा गाना 'सुबह-सुबह' भी लोगों को पसंद आ रहा है. फिल्म के म्यूजिक को लेकर लव रंजन ने नए गानों के बजाय पुराने गानों पर विश्वास जताया और उन्हें रीमिक्स किया है और उनका ये पैंतरा हिट भी साबित हुआ.


क्यों देखें/ क्यों न देखें


अगर आपको कॉमेडी फिल्म पसंद और इस वीकएंड आप एक लाइट हार्टेड फिल्म देखना चाहते हैं तो ये फिल्म एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. साल 2018 की शुरुआत से ही बॉक्स ऑफिस पर काफी सीरियस फिल्में रिलीज हो रही हैं और ऐसे में अगर आप इश्यू बेस्ड फिल्मों से बोर हो गए तो आप इस वीकेंड ये फिल्म देख सकते हैं.


क्यों न देखें, इस फिल्म में बात चाहे कहानी को हो या कॉमेडी की तो आपको बहुत कुछ नयापन नहीं देखने को मिलेगा. फिल्म में सिर्फ स्वीटी को क्रिटीसाइज और बुरा दिखाया जा रहा है और कुल मिलाकर ये फिल्म सिर्फ सेक्सिस्ट जोक्स पर टिकी हुई है.