मुश्किलों को आगे बढने का माध्यम बनाएं आप कभी किसी बहती हुई नदी को देखेंगे तो पाएंगे कि वह निरंतर आगे बढ़ती रहती है, जब तक कि वह सागर से न मिल जाए। हां, रास्ते में बहुत-सी रुकावटों को पार करना पड़ता है, तब कहीं जाकर समुद्र से एकत्व प्राप्त होता है। जीवन में आगे बढने का मूल-मंत्र भी यही है। यदि सफलता के समुद्र से मिलना हो तो बाधाओं से टकराकर आगे बढ़ते रहने का हौसला होना चाहिए। हमें ऐसा मनोभाव अपने अंदर बनाए रखना चाहिए जहां कठिनाइयों को सफलता का सोपान समझा जाए। आजकल मनोविज्ञान की भाषा में इसे च्ग्रोथ माइंडसैटज् के नाम से पुकारा जाता है। यह एक ऐसी मनोदशा है जिसमें हर मुश्किल को आगे बढ़ने के माध्यम की तरह देखा जाता है। 


 


सफल होने के लिए सर्वाधिक आवश्यक है वह मनोदशा, जहां हर चुनौती को एक मौके के तौर पर देखा जाता है। खुद को साबित करने का मौका, बाधाओं पर विजय पाने का मौका, जीवन यात्रा का आनंद उठाने का मौका। जो लोग स्वयं के भीतर इस तरह की मनोदशा पैदा करने में कामयाब हो जाते हैं, जीवन के हर क्षेत्र में सफलता उनके कदम चूमने लगती है। स्टीव जॉब्स को कम्प्यूटर व तकनीक के क्षेत्र का सबसे सफल व रचनात्मक व्यक्ति माना जाता है। जॉब्स की कहानी भी बड़ी रोचक है। सन 1976 में गैरेज से एप्पल की शुरूआत, 85 में उसी कंपनी से बेदखल किया जाना, 9 7 में वापसी कर फिर उसी कंपनी को कंगाल होने से बचाना और 2011 में अपनी मृत्यु तक कंपनी को दुनिया की सबसे धनी कंपनी बनाना।


 


जॉब्स के जीवनीकार वॉल्टर आइजेक्सन के अनुसार उनकी सबसे बड़ी खूबी थी चुनौतियों का मजा लेना और उनके रचनात्मक हल निकालना। मुश्किलों को रास्ता बनाने वाले यही करते हैं। जॉब्स ने हर मुश्किल को आगे बढ़ने के माध्यम की तरह लिया। अपने चारों ओर देखें तो यही पाएंगे कि जितना बड़ा व्यक्ति है, उसने उतनी ही बड़ी बाधाओं को पार किया है। इसलिए अगर जीवन में बड़ा बनना हो तो अपना नजरिया बदलकर इस च्ग्रोथ माइंडसैटज् को अपनाना ही सबसे प्रभावी तरीका है।