भारतीय वास्तुपशास्त्र में न केवल दिशाओं के प्रभाव के बार में बताया गया है कि बल्कि विभिन्न प्रकार के वृक्षों एवं वनस्पतियों की प्रकृति के लक्ष्ण व स्वभाव के बारे में भी बताया गया है। वास्तु के अनुसार अगर घर में कुछ पौधों या वृक्षों को सही दिशा में रखा जाए तो यह घर-परिवार पर शुभ प्रभाव डालते हैं। इतना ही नहीं दिशा के अनुरूप उपयुक्त वृ़क्षों को लगाकर घर में निवास करने वालों सदस्यों में समृद्धि, संपत्ति, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति को प्राप्त किया जा सकता है।


आवास के उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण में अमरूद, शरीफा, बादाम, केला या नारियल के वृक्षों को लगाने से व्यवसाय में हानि तथा असाध्य बीमारियों के होने के संकेत मिलते हैं। 



आवास परिसर में सहजन के वृक्ष को लगाने से स्त्री संबंधी व्याधियों एवं परेशानियों को अधिक झेलना पड़ता है।



विशाल एवं बहुत फैले हुए वृक्ष जैसे बरगद, पीपल तथा ऊंचे व लंबे जैसे नारियल,पाम आदि पूर्व, उत्तर एवं उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं लगाना चाहिए। यह प्रात: कालीन सूर्य की स्वास्थ्यवर्धक किरणों को घर में प्रवेश करने देने में बाधक होते हैं। बड़े अथवा ऊंचे वृक्ष दक्षिण तथा पश्चिम दिशा में लगाए जाने पर लाभप्रद होते हैं। ये अपरान्ह की सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को घर में प्रवेश करने से रोकते हैं। 



घर की उत्तर दिशा में रबर प्लांट, सहजन,पपीता, बादाम आदि के वृक्षों को लगाने से बुद्धि भ्रष्ट एवं अर्थनाश की संभावना रहती है। उत्तर दिशा की ओर अमरूद, पाकड़, अमलताश आदि के पेड़ लगाने लाभप्रद होते हैं। 



घर के चारों ओर वृक्ष इस प्रकार लगाने चाहिएं कि प्रात: 1 बजे से अपराहन 3 बजे तक उनकी छाया भवन पर न पड़े। 



उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में नीम, नीलगिरी के वृक्षों की छाया प्रगति में बाधक तथा अकारण शत्रुता उत्पन्न करने वाले हुआ करते हैं।