17 फरवरी, 2018 शनिवार फाल्गुन शुक्ल तिथि द्वितीया को फुलैरा दूज पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही होली के रंगों का आरंभ हो जाएगा। यह फाल्गुन महीने का अत्यधिक मंगलमय दिन है। श्रीराधाकृष्ण की नगरी मथुरा और वृंदावन का यह खास त्यौहार है। इस रोज युगल सरकार के पूजन करने का विशेष महत्व है। मंदिरों को विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है। देव प्रतिमाओं का श्रृंगार भी फूलों से किया जाता है। कहते हैं इस दिन श्रीराधाकृष्ण पर अबीर और गुलाल अर्पित करने से वो बहुत प्रसन्न होते हैं।

वर्ष 2018 में फुलैरा दूज का शुभ मुहूर्त दो दिन तक रहेगा। 17 फरवरी 3.56 से आरंभ होकर 18 फरवरी की शाम 4.50 तक होगा। 

शहरों में चाहे इस त्यौहार की धूम न रहती हो लेकिन गांव में इसकी रौनक किसी पर्व से कम नहीं होती। घरों में भी फूलों की रंगोली सजाई जाती है और अन्य साज-सज्जा भी फूलों द्वारा की जाती है। मिष्ठान बना कर सर्वप्रथम भगवान को भोग लगाएं। फिर जितना संभव हो उस प्रसाद को बांटे और अंत में स्वयं ग्रहण करें।

फुलैरा दूज पर अबूझ मुहूर्त होता है। इस रोज किसी भी शुभ काम के लिए पंचांग देखने की अवश्कता नहीं होती। कोई भी नया काम शुरू करना हो या किसी नए रिश्ते का आरंभ करना फुलैरा दूज के शुभ मुहूर्त में किया जा सकता है। किसी विवाह बंधन में बंधने के लिए तो ये दिन सर्वोत्तम माना गया है। शादी करने के लिए तो यह शीत ऋतु का अंतिम दिन है।

ज्योतिष विद्वान फुलैरा दूज के दिन के बारे में कहते हैं इस दिन मुहूर्त व लग्र निकालने की जरूरत नहीं होती। सीधे कोई भी काम किसी भी वक्त पर किया जा सकता है। जिन लोगों की शादी का लग्न नहीं निकल पाता वे इस दिन बिना किसी लग्न के शादी कर सकते हैं।