ज्योतिष में ग्रहण का विशेष महत्व माना गया है. साल का पहला सूर्यग्रहण 16 फरवरी को लगा. भारतीय समय के अनुसार यह रात्रि 00.25 से 04.17 तक रहा. इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 03 घंटे 52 मिनट थी.  ज्योतिष में ग्रहण को अशुभ और हानिकारक प्रभाव वाला माना जाता है.

सूर्य ग्रहण में सूर्य का संयोग शुक्र बुध और चंद्र से बन जाएगा. साथ ही इस ग्रहण में सूर्य का सम्बन्ध शनि और मंगल से भी बन जाएगा. सूर्य मंगल शनि और चंद्र का प्रभाव होने से दुर्घटनाओं की सम्भावना बन जायेगी. इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव लगभग एक पक्ष तक बना रहेगा. ज्योतिष की भाषा में जब भी सूर्य और चंद्रमा राहु और केतु से पीड़ित होते हैं, तब-तब ग्रहण की घटना घटित होती है. सूर्य और चंद्रमा का सीधा एवं प्रत्यक्ष प्रभाव पृथ्वी पर है और उनकी किरणों से पूरी तरह सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है. सूर्य ग्रहण के खत्म होने के बाद तुरंत ये उपाय करके ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं क्या हैं ये उपाय...

ग्रहण खत्म होते ही स्नान करें. स्नान करने के बाद नए या साफ सुथरे वस्त्र धारण करें. इसके बाद गुड़, गेंहू और ताम्बे के बर्तनों का दान करें.

ग्रहण काल के खत्म होने बाद देवताओं की मूर्तियों को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करना चाहिए.

ग्रहण खत्म होते ही घर के भीतर और आस-पास के पौधों को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर देना चाहिए.

घर में पोंछा लगाकर धूप-बत्ती करनी चाहिए, जिससे सारी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाए.

अपने पितरों को याद करें और दान करें. अगर आसपास कोई धार्मिक स्थल है तो वहां जाएं.

अगर आस-पास घाट हो तो वहां जाकर शिव जी की पूजा करनी चाहिए.