पटना। बिहार में तीन सीटों को लेकर उपचुनाव की तारीख का एलान होते ही बिहार में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच घमासान मचा हुआ है। वैसे उपचुनाव तो एक लोकसभा और दो विधानसभा की सीटों के लिए होना है लेकिन इन तीन सीटों को लेकर ही दोनों गठबंधन दलों के बीच जंग छिड़ी हुई है और रूठने मनाने का खेल चल रहा है। 


पहले बात करें एनडीए की तो उसके सहयोगी दलों में जीतनराम मांझी की पार्टी हम जहां जहानाबाद की सीट के लिए जिद ठान बैठी है तो वहीं उसी सीट के लिए रालोसपा के दोनों गुट भी इस सीट के लिए अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं।


जीतनराम मांझी ने तो सोमवार को ये तक कह दिया कि कुछ भी हो जाए जहानाबाद की सीट से हम का उम्मीदवार ही होगा। इसके लिए कुछ भी हो जाए, इसके लिए पीएम मोदी से बात करनी पड़े या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बात करनी पड़े।


मांझी की इस जिद के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय उनके आवास पहुंचे थे और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की थी। वहीं, रालोसपा का उपेंद्र गुट भी इस सीट को लेकर जिद कर बैठा है और शिक्षा में सुधार को लेकर बनी मानव में राजद से उसकी नजदीकी को लेकर एनडीए को परेशानी है ही।

वहीं भाजपा अब सहयोगियों की जिद के आगे यह तय नहीं कर पा रही कि वह कितने सीटों के लिए दावा करे। हालांकि आज बिहार के स्वास्थ्यमंत्री और भाजपा नेता मंगल पांडे ने कह दिया कि हम दो सीटों पर चुनाव लड़ेंगे लेकिन उन्होंने खुलासा नहीं किया है कि किन सीटों पर दावेदारी करेंगे।


वहीं एनडीए के खिलाफ गोलबंदी में जुटी मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस खुद में ही उलझ गई है। एक ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह ने भभुआ सीट को लेकर कहा कि राजद अररिया और जहानाबाद से अपना उम्मीदवार खड़ा करे, इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भभुआ सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस की रही है। 


उन्होंने कहा कि भभुआ से आठ बार कांग्रेस विधायकों ने जीत दर्ज की है इसीलिए भभुआ सीट से हम हर हाल मेें चुनाव लड़ेंगे। राजद को धमकी देते हुए उन्होंने कहा कि महागठबंधन चलाना सिर्फ एक पार्टी की जिम्मेदारी नहीं है। अगर इस सीट से राजद अपना उम्मीदवार उतारती है तब भी कांग्रेस चुनाव मैदान में उतर सकती है और अपनी ताकत दिखा सकती है।


भभुआ सीट कांगेस की परंपरागत सीट वाले सदानंद सिंह के बयान के बाद  राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि भभुआ सीट पर राजद का प्रत्याशी ही लड़ेगा चुनाव क्योंकि कांग्रेस का एक धड़ा नीतीश के साथ मिला हुआ है। कांग्रेस का धरातल खुद ही कमजोर हो गया है


बता दें कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उपचुनाव की तिथि की घोषणा के दिन ही रांची से एेलान किया था कि हम तीनों सीट पर चुनाव लड़ेंगे। उसके बाद कांग्रेस भभुआ सीट पर दावेदारी कर रही है जिससे लगता है कि गठबंधन की डोर कमजोर ना हो जाए। 


शिवानंद तिवारी के बयान का जवाब देते हुए कांग्रेस के विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि कौन किसके साथ जाएगा ये तो मालूम नहीं। पर राजद नेताओं के ऐसे बयान बर्दाश्त नही किये जाएंगे।


इधर कांग्रेस के ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा, ये कैसा गठबन्धन है जिसमें एक दल दूसरे को कमजोर कह रहे। उन्होंने कहा कि अब तो कांग्रेस को सभी सीट पर अपने उमीदवार खड़े करने चाहिए।उन्होंने कहा कि राजद को गठबंधन करना है तो सम्मानजनक तरीका अपनाए, एेसा नहीं है कि कांग्रेस राजद का पिछलग्गू बनकर रहेगा। 

अशोक चौधरी ने कहा कि अररिया-भभुआ की सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए। अररिया सीट पर चुनाव लड़ने से इसके दूरगामी परिणाम आएंगे। इसका मैसेज राष्ट्रीय स्तर पर जाएगा, क्योंकि पिछले कई वर्षों से राजद ने कांग्रेस को कुछ नहीं दिया है। 

अपनी ही पार्टी के नेताओं के बयान पर कांग्रेस के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि चुनाव को लेकर कहीं कोई परेशानी नहीं है। आपस में बैठकर बात हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी ने सही कहा है कि मिल बैठकर बात कर सीटों का बंटवारा कर लेंगे।


उन्होंने पार्टी के नेताओं को हिदायत देते हुए कहा कि बिना मतलब की बयानबाजी ठीक नहीं है। नेताओं को संयम रखना चाहिए। हमारे तरफ से कुछ नहीं बोला जा रहा है, चुनाव की तैयारी हम भी कर रहे हैं।


वहां आज राजद की कोर कमिटी की बैठक चल रही है जिसमें उपचुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नाम पर बात चल रही है कि कौन उम्मीदवार कहां से चुनाव लड़ेगा। बैठक की अध्यक्षता खुद राबड़ी देवी कर रही हैं। उन्होंने भी संकेत दिए कि कांग्रेस के नेता आकर मिलें और डिमांड करें तो सीट को लेकर बात हो सकती है। 


वहीं दूसरी ओर एनडीए का बिहार में प्रमुख घटक और सत्ताधारी पार्टी जदयू ने इस उपचुनाव से खुद को किनारे कर लिया है और कहा है कि हमारा कोई उम्मीदवार उपचुनाव नहीं लड़ेगा। इस फैसले पर विरोधी पार्टी राजद ने तरह-तरह के सवाल उठाए और कहा कि भाजपा के दबाव में आकर जदयू ने यह फैसला लिया है।


उनके इस आरोप का जवाब देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि जदयू के किसी भी सीटिंग उम्मीदवार की जगह खाली नहीं हुई थी जिस वजह से हमने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और ये हमारा नहीं पार्टी का फैसला है। उन्होंने कहा कि हर पार्टी अपना खुद का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। 


इन बड़े राजनीतिक दलों की खींचतान के बीच सांसद पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी ने भी बिहार में उपचुनाव लड़ने का मन बना लिया है। इसके साथ ही पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने आगामी लोकसभा और विधानसभा की सभी सीटों पर चुनाव  लड़ने की घोषणा की है।

 

बता दें कि बिहार में उपचुनाव के लिए मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है और इसके साथ ही चुनाव के लिये आज से प्रत्याशियों की घोषणा शुरू हो जाएगी। अधिसूचना जारी होने के साथ ही तीनों जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

 

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने तीनों सीटों पर नामांकन के आदेश जारी कर दिए हैं। मार्च में अररिया में लोकसभा और जहानाबाद और भभुआ में विधानसभा उपचुनाव होना है। तीनों सीटों पर 11 मार्च को उप चुनाव के लिए वोटिंग होनी है।