मध्य प्रदेश के कोलारस और मुंगावली उपचुनाव में कांग्रेस से सीधी टक्कर में फंसी भाजपा के लिए अपने ही मुसीबत का सबब बन रहे है. पार्टी के सिंधिया को डैमेज नहीं करने की लाइन तय करने के बाद भी लगातार ऐसे मुद्दे उठाए जा रहे है, जिससे सिंधिया पर हो रहे 'व्यक्तिगत' हमले परोक्ष रूप से उन्हें ही फायदा पहुंचा रहे हैं.


दरअसल, राजस्थान चुनाव में मिली हार और गुजरात में लगे झटके के बाद भाजपा ने मध्य प्रदेश में अपनी राजनीति का स्टाइल बदल दिया था. शिवराज से लेकर पवैया तक सिंधिया पर व्यक्तिगत हमले की रणनीति से पीछे हट गए थे. भाजपा का मानना था कि 'सिंधिया' पर निजी हमले उनकी लोकप्रियता को कम करने के बजाए वहां के लोगों में भाजपा के लिए नाराजगी का सबब बन रहे है.


कोलारस और मुंगावली चुनाव में इसी नीति पर भाजपा काम कर रही है, लेकिन कम से कम राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा पर पार्टी का यह फैसला लागू होता नहीं दिख रहा है. प्रभात झा ने कहा है कि महलों में रहने वाले लोग गरीबों का दर्द नहीं समझ सकते. सिंधिया पर हमला बोलने के चक्कर में प्रभात झा ये भूल गए कि उन्हीं के परिवार से आने वाली राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और प्रदेश की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी महल से ताल्लुक रखती है.


सिंधिया के खिलाफ तंज कसने के 24 घंटे से भी कम समय के बाद प्रभात झा ने एक और सियासी दांव खेला है. उन्होंने सिंधिया की सभा में जान से मारने की धमकी दिए जाने के बारे में चुनाव आयोग को खत लिखा है. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.



माना जा रहा है कि ऐसा करके प्रभात झा उस जाल में फंसते जा रहे है, जिससे आखिरकार फायदा सिंधिया को ही मिलेगा. हालांकि, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल इससे इत्तफाक नहीं रखते हैं. उनका कहना है, 'जान से मारने की धमकी देना बेहद संवेदनशील मसला है. उस क्षेत्र में चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.'


दरअसल, प्रभात झा पर भी सवाल उठ रहे है क्योंकि भाजपा के स्थानीय नेता मलकीत सिंह ने मुंगावली से टिकट नहीं मिलने के बाद आरोप लगाया था, 'चुनाव प्रभात झा ने सिंधिया जी के साथ मिलकर फिक्स किया है. प्रभात झा कुछ भी कर सकते हैं, उन्होंने टिकट बेचा है. एक ही गांव एक ही परिवार के लोगों को टिकट दिया है. मेरे पास प्रभात झा के खिलाफ प्रमाण हैं. मंच लगाकर एक-एक खुलासे करूंगा.'


हालांकि, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की समझाइश के बाद मलकीत सिंह पीछे हट गए थे. उन्होंने कहा था , 'प्रभात झा मेरे बड़े भाई है. उनसे क्रोध में कहीं बातों के लिए माफी मांगता हूं. मैं पूरी तरह से भाजपा के साथ हूं.