ग्वालियर। आप लोग अपनी बेटियों की 8वीं कक्षा के बाद पढ़ाई क्यों बंद करा देते हो। बेटियों से मैंने बात की है उनका पढ़ने का मन है, लेकिन आप लोग उन्हें स्कूल जाने नहीं देते हो। यह बात अडूपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में निरीक्षण के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वहां मौजूद अभिभावकों से पूछी। अभिभावकों ने जवाब देते हुए कहा कि उनके गांव में कक्षा 8वीं तक ही स्कूल है इसके आगे की पढ़ाई के लिए 5 किलोमीटर दूर गुर्जरों के गांव रौरा में जाना पड़ता है। गुर्जरों का गांव होने के कारण हम अपनी बेटियों को वहां पर नहीं भेजते हैं।


ग्वालियर प्रवास पर आईं मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को अड़ूपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने कक्षा 8वीं की छात्राओं से बात की। छात्राओं से उन्होंने पढ़ाई के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि कक्षा 8वीं के बाद उनके परिजन आगे पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं। इसके बाद राज्यपाल ने विद्यालय परिसर में मौजूद करीब आधा सैकड़ा अभिभावकों से बात की।


राज्यपाल ने कहा कि मैं सभी अभिभावकों से निवेदन करती हूं कि यहां पर जितनी भी छात्राएं कक्षा 8वीं में पढ़ती हैं, उनका जून में नजदीकी विद्यालय में दाखिला कराएं। कलेक्टर राहुल जैन ने संशोधित करते हुए कहा कि रौरा गांव स्थित हाईस्कूल में कक्षा 9 वीं में प्रवेश दिलाएं। अभिभावक बोले कि वहां जाने में परेशानी आती है, साइकिल से जाना पड़ता है।


राज्यपाल बोलीं कि यह आपकी परेशानी है भइया। लड़के आधा घंटे का समय निकालकर सुबह विद्यालय छोड़ने और शाम को बहनों को लाने के लिए निकालें। ऐसा काम करोगे तो माहौल अच्छा हो जाएगा। साइकिल भी सरकार देती है वह भी ले लो। लड़कियां पढ़ती भी हैं।


अभिभावक बोले कि मैडम यहीं पर हाईस्कूल खुल जाए तो अच्छा होगा। कलेक्टर राहुल जैन ने कहा कि यहां पर इतने बच्चे नहीं हैं। कक्षा 9वीं के यहां कुल 18 बच्चे हैं। जिस पर राज्यपाल बोलीं कि यहां पर 100-150 बच्चे हो जाएं तो हाईस्कूल भी होगा। मैंने बेटियों से पूछा कि वह पढ़ने के लिए जाना चाहती हैं। अभिभावक बोले कि मैडम गुर्जरों का गांव है इसलिए नहीं भेजते हैं।


राज्यपाल बोलीं कि बहाना नहीं बनाओ रास्ता निकालो। रास्ता निकलना चाहिए। मेरे पिता ने मुझे 70 साल पहले पढ़ाया, उस समय साइकिल, सड़क कुछ नहीं था, लेकिन पिता जी छोड़ने जाते थे और लेने आते थे। आपको गांव के लोगों को संकल्प लेना होगा कि हमारी बेटियां बिना पढ़ी लिखी नहीं होंगी। मैं निवेदन करती हूं आप पढ़ाइएं। बेटियां बेटों से अधिक पढ़ती हैं बेटे 50 प्रतिशत अंक लाते हैं तो बेटियां 75 से 80 प्रतिशत अंक लाती हैं। बेटियों का भविष्य खराब न करें। हमारा दायित्व बनता है कि हम सभी को पढ़ाएं। मैं जून में इन्क्वायरी करूंगी कि आपने क्या किया।


छात्रा से लगवाई झाडू, बच्चों ने डाला चूना


राज्यपाल आनंदीबेन के आने से पहले कक्षा 5वीं में गंदगी थी। वहां पर अध्यापकों ने एक छात्रा से झाडू लगाने के लिए बोल दिया। इसके बाद छात्रा ने पूरी कक्षा की झाडू लगाई। जैसे ही मीडिया ने बच्ची के फोटो खीचें तो अध्यापक कक्षा में पहुंचे और बोले छात्रा से झाडू क्यों लगवा रहे हो। वहीं गांव के अंदर राज्यपाल आनंदीबेन के वाहन को रास्ता दिखाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा सड़क पर चूना डलवाया जा रहा था। चूना डालने के लिए पुलिस ने छोटे बच्चों को बुलाकर कार्य कराया।


राज्यपाल के कहने पर बुलाए गए सीएमएचओ


राज्यपाल आनंदीबेन जब कक्षा 5वीं में पहुंचीं और छात्राओं से बात की तभी एक छात्रा के कान में दर्द होने लगा। राज्यपाल ने छात्रा से परेशानी का कारण पूछा तो उसने कान में दर्द होने की बात बताई। राज्यपाल ने तत्काल डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा। सूचना मिलते ही सीएमएचओ एसएस जादौन कक्षा में पहुंचे तो अधिकारियों ने उनसे कहा कि बच्ची के कान में दर्द हो रहा है उसका इलाज करो।