मध्य प्रदेश के श्योपुर में दबंगों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. श्योपुर के थाना देहात इलाके के बालापुरा का टपरा गांव में दबंगों का आतंक इस कदर है कि दलित समाज के लोगों को अपने घरों को छोड़ना पड़ रहा है. प्रशासन ने भी दबंगों का साथ देते हुए गांव के स्कूल बंद करवा दिए हैं.


इस गांव में दलित समाज के करीब 20 से ज्यादा परिवार रहते थे. लोगों को घर, स्कूल, आंगनबाड़ी के सूने भवन यहां की दास्तां बयां कर रहे हैं. कभी बच्चों की चहक से गूंजते इस गांव में अब दबंगों की दहशत है.


दबंगों के डर के कारण कभी आबाद रहा यह गांव आज वीरान हो गया है. लोगों ने गांव छोड़ दिया है और दूसरे गांवों में पनाह ली है. गांव की पीड़ित रोशन बाई का कहना है कि दबंगों ने दलितों को गांव से भगाने के लिए पहले उनके रास्तों को बंद किया फिर हैंडपंप पर कब्जा कर पानी पर ताला लगा दिया. अगर कोई ग्रामीण जबरन पानी भरने जाता तो दबंगों की टोली मारपीट करने पर आमादा हो जाती थी. ऐसे में डर के कारण गांव से दलित समाज के लोग पलायन कर गए.


बालापुरा का टपरा गांव से न केवल दलित बस्ती खाली हुई है बल्कि यहां के स्कूल और आंगनबाड़ी को भी वीरान होना पड़ा. इन सब के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास नही किया कि गांव खाली कैसे हो गया और स्कूल व आंगनबाड़ी कैसे बंद हो गये. स्कूल को अब भैंसों के रहने का स्थान बना दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम लोगों को गांव के हालात दिखाई देते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नही दिखाई देते.


बालापुरा का टपरा गांव के वीरान होने की खबर क्षेत्र के विधायक दुर्गालाल विजय को भी नही है. गांव के हालात पर भाजपा विधायक का कहना है कि इस गांव के खाली होने की सूचना उन्हे नही थी. उन्हे आज ही इस बात का पता चला है कि इस गांव के दलितों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ. उन्होने कहा कि आज ही अधिकारियों से बात करके ग्रामीणों को फिर से गांव में लाने का प्रयास किया जाएगा. कलेक्टर पन्ना लाल सोलंकी भी इस मामले में कोई शिकायत ना मिलने की बात कहते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे है.


दबंगों के कहर का  यह कोई पहला मामला नही है, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नही हो पाती. क्षेत्र में दबंगों के हौसले इतने बुलंद है कि वे गांव भी खाली करवा सकते हैं. अब सवाल यह उठता है कि जिस दलित बस्ती के साथ यह हुआ क्या प्रशासन इसके जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा?