छत्तीसगढ़ के अचानक मार टाइगर रिजर्व में पकड़कर रखे गए सोनू हाथी को पुनः पुनर्वासित करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दायर की है. मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खनविलकर और न्यायमूर्ति डीवाय चंद्रचूड की पूर्ण पीठ ने इसके पहले 9 जनवरी 2018 को निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सोनू हाथी को वापस जंगल में पुनर्वासित करने के लिए जो दिशा - निर्देश दिए हैं, उनका पालन नहीं किए जाने पर याचिकाकर्ता पुनः हाईकोर्ट जा सकता है.


मुख्य वन जीव संरक्षण को आदेशित किया गया था कि सोनू को पकड़कर वापस हाथियों के रहवास क्षेत्र में छोड़ा जाए. आरोप है कि वन विभाग ने सितम्बर 2015 से सोनू को बंधक बना कर रखा है. उसके पैरो में जंजीर और रस्सी बंधे होने के कारण जख्म हो गए है.


दरअसल मामला यह है कि लंबे समय से सोनू हाथी को अचानक मार्ग टाईगर रिजर्व में बंधक बनाकर रखे जाने के कारण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रायपुर के नितिन सिंघवी की ही याचिका पर जूलाई 2017 में त्रिशूल केरल के कॉलेज ऑफ वेटनरी और ऐलिफेंट साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर (सेंटर फॉर स्टडी ऑफ एलिफैंट) डॉ.राजीव टीएस ने रिपोर्ट में उल्लेखित किया है कि सोनू और 3 हाथियों को बंधक बनाकर रखे गए चारो हाथी को जंगल में छोड़ा जाना चाहिए और किसी भी हालत में उन्हें चेन से बांधकर नहीं रखना चाहिए.