रूस के वीटीबी बैंक की अगुआई वाला समूह सोमवार को एस्सार स्टील के लिए बोली लगाने के लिए तैयार है और बोली 30 अरब रुपये के उच्चस्तर तक पहुंच सकती है। इस समूह में रुइया की अल्पांश हिस्सेदारी है। आर्सेलरमित्तल और टाटा भी कंपनी खरीदने की दौड़ में है, जिसके पास हजीरा, गुजरात में 1 करोड़ टन सालाना उत्पादन की क्षमता है और दिसंबर 2015 में बैंक के  कर्ज भुगतान मेंं चूक के बाद एनसीएलटी की कार्यवाही का सामना कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, आर्सेलरमित्तल अकेले बोली लगा सकती है। आर्सेलरमित्तल और निप्पॉन स्टील ऑफ जापान ने एस्सार स्टील के लिए अलग-अलग जांच परख (ड्यू डिलिजेंस) की है, लेकिन संयुक्त बोली के लिए ये दोनों बातचीत कर रही थी। आर्सेलरमित्तल ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।



भूषण स्टील, भूषण पावर और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए दूसरी सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरने के बाद टाटा इस कंपनी के लिए संकीर्ण बोली लगा सकती है। तीनों कंपनियों के अधिग्रहण में सबसे आगे रहने वाली जेएसडब्ल्यू स्टील एस्सार के लिए बोली नहीं लगा रही है। कंपनी के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। बाजार को उम्मीद नहीं है कि वेदांत एस्सार स्टील के लिए बोली लगाएगी, हालांकि इसने एस्सार स्टील का ड्यू डिलिजेंस किया है। वेदांत ने भूषण स्टील और भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए बोली लगाने से दूरी बनाए रखी। सूत्रों ने संकेत दिया कि गोवा खदान रद्द होने के चलते वेदांत को शायद मुश्किल हो रही हो, जो इलेक्ट्रोस्टील के लिए सबसे बड़ी बोलीदाता रही है और यह शायद अपनी पेशकश को संशोधित नहीं करना चाहती हो।


टाटा स्टील पहले ही लेनदारों की समिति को लिखा है और कहा है कि वह पहले की पेशकश को संशोधित करना चाहती है। 220 अरब के समापन कीमत वाली एस्सार स्टील सभी बोलीदाताओं के लिए अहम परिसंपत्ति है। सरकार की तरफ से अन्य उद्योग मसलन उर्वरक को गैस आपूर्ति डायवर्ट किए जाने के बाद कंपनी मुश्किल में फंस गई। कंपनी का उत्पादन भी नक्सलियों की तरफ से इसके पाइपलाइन के उड़ाए जाने के बाद रुक गया था और कंपनी ने अपने कर्ज के भुगतान में चूक की।



बोलीदाताओं में शामिल वीटीबी बैंक अपनी बोली के लिए सबसे आक्रामक हो सकती है और इसे मौजूदा प्रवर्तकों रुइया का भी समर्थन हासिल है, जिनकी अल्पांश हिस्सेदारी बोली लगाने वाले  समूह में है। आर्सेलर मित्तल अगर बोली लगाती है तो यह इसके लिए भारत में दबाव वाली पहली परिसंपत्ति होगी। भूषण स्टील और भूषण पावर ऐंड स्टील का ड्यू डिलिजेंस करने के बाद अभी तक इसने किसी दबाव वाली परिसंपत्ति के लिए बोली नहीं लगाई है। जब डिफॉल्ट करने वाली कंपनी के प्रवर्तकों को बोली लगाने से रोकने के लिए दिवालिया संहिता का पिछले नवंबर में संशोधन किया गया था तो इसमें धारा 29 ए जोड़ी गई थी, जो प्रवर्तकों व एक साल से ज्यादा समय तक एनपीए वाली सहायक कंपनियों को नीलामी में हिस्सा लेने से रोकती है। ऐसे में आर्सेलरमित्तल ने उत्तम गैल्वा स्टील्स की अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जो आरबीआई की डिफॉल्टरों की दूसरी सूची में शामिल है।



हालांकि केएसएस पेट्रोन के लेनदार (एसबीआई की डिफॉल्टर) चाहते हैं कि एल एन मित्तल (आर्सेलरमित्तल के प्रवर्तक) उनका बकाया भुगतान करें। पहले दिए गए बयान में आर्सेलरमित्तल ने कहा था कि पेट्रोन के साथ उनका कोई जुड़ाव नहीं है और उन्हें नहीं लगता कि इस प्रक्रिया में कंपनी प्रासंगिक है। इसने कहा था, आर्सेलरमित्तल वित्तीय रूप से समृद्ध कंपनी है और परिस्थितियों के कायापलट के लिए इसके पास काफी गहरा अनुभव है।