दक्षिण अफ्रीका ने टीम इंडिया की शानदार जीत की लय को तोड़कर चौथे वनडे में फतह हासिल कर ली. पहले तो यह मैच बारिश की वजह से बार-बार बाधित हुआ, फिर कुछ ऐसे मौके थे, जो टीम इंडिया के खिलाफ गए. वैसे टीम इंडिया ने इस मैच को जीतकर सीरीज अपने नाम करने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी. लेकिन वक्त ने इस मैच में हमेशा साथ साउथ अफ्रीका का दिया.


हार्दिक पंड्या का कैच आसान नहीं था...


पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया एक समय काफी बेहतर स्थिति में थी. 2 विकेट पर टीम 178 रन बना चुकी थी. 34वें ओवर में बारिश के कारण खेल रोक दिया गया. मैच दोबारा शुरू हुआ तो भारत को लगातार कुछ रनों के अंतराल पर 3 झटके लगे. जिसके बाद 247 रनों पर भारत के 5 विकेट गिर गए. इसके बाद महेंद्र सिंह धोनी का साथ देने हार्दिक पंड्या आए. लेकिन पंड्या जब 9 रनों पर खेल रहे थे, उसी समय कागिसो रबाडा की एक तेज गेंद को उन्होंने खेला, लेकिन सामने खड़े एडेन मार्करम ने हवा में उछलते हुए इस मुश्किल कैच को पकड़ लिया. इस कैच को साल का सबसे बेस्ट कैच माना जा रहा है. जिस किसी ने भी ये कैच देखा, उसे आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. लेकिन ये मैच के लिए अहम टर्निंग प्वाइंट था, अगर पंड्या क्रीज पर रहते तो स्कोर आसानी से 300 के पार जाता.


तीन हार औैर फिर बदल गई जर्सी का रंग


भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चौथे वनडे मैच में पहले तीन मैचों के मुकाबले अफ्रीका दूसरे रंग में नजर आई. पिंक ड्रेस में उतरी अफ्रीकी टीम ने गेंदबाजी करते हुए चौथे मैच में भारतीय धुरंधरों पर कुछ हद तक लगाम लगाई. अपनी गेंदबाजी के अलावा कमाल के क्षेत्ररक्षण के सहारे बड़े स्कोर की ओर बढ़ रही विराट कोहली की टीम को 289 रनों पर रोक दिया. इसमें टीम की गेंदबाजी के साथ-साथ कमाल की फील्डिंग का भी बड़ा योगदान रहा. जिसमें एडेन मार्करम का हवा में उछलकर कैच पकड़ना अहम रहा.


मिलर पर ऊपरवाला था मेहरबान


शनिवार का दिन डेविड मिलर के लिए शानदार रहा, मिलर को दो बार जीवनदान मिले. मिलर को जीवनदान देना भारत को भारी पड़ा. एक बार डीप में उनका कैच छूटा तो दूसरी बार युजवेंद्र चहल की 'नो बॉल' गेंद पर वह बोल्ड हुए. वह उस समय क्रमश: 6 और सात रन पर थे. उन्होंने इन जीवनदान का फायदा उठाते हुए महज 28 गेंद में ताबड़तोड़ 39 रन बना डाले. मिलर ने जीवनदान का भरपूर फायदा उठाया और खेल का रूख ही बदल दिया. आमतौर पर स्पिनर नो बॉल नहीं फेंकते, लेकिन वक्त मिलर का साथ दे रहा था और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की जीत में बड़ी भूमिका निभाई.


ये एक गलती भी टीम इंडिया को पड़ी भारी


कप्तान विराट कोहली द्वारा डेथ ओवरों में भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह के बजाय स्पिनरों से गेंदबाजी कराने का फैसला भी सबको हैरान किया. डेथ ओवरों में भुवनेश्वर और बुमराह से गेंदबाजी नहीं कराई गई जबकि कलाई के स्पिनर काफी रन गंवा रहे थे. डेथ ओवरों में बल्लेबाज ताबड़तोड़ रन बन रहे थे लेकिन कोहली स्पिनरों पर दांव लगाए बैठे थे. कोहली का यह फैसला हालांकि कारगर नहीं रहा क्योंकि स्पिन जोड़ी दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों को रोकने में असफल रही जिससे उन्होंने 11.3 ओवर में 119 रन लुटाये और महज तीन विकेट हासिल किए. ये एक फैसला इस मैच में कोहली के खिलाफ गया. शायद चौथे मैच तक पहुंचते-पहुंचते अफ्रीकी बल्लबाजों ने कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल की तोड़ निकाल ली थी. बल्लबाजों को गेंद समझने में परेशानी नहीं हो रही थी.


हालांकि अभी दो मैच बचे हैं और अब भी भारत का पलड़ा भारी है. ऐसे में साख दांव पर अफ्रीकी टीम की लगी है. सीरीज में अभी भी भारत 3-1 से आगे है. शायद, इस हार से टीम इंडिया को कुछ सीख जरूर मिली होगी और अगले मैच वो बेहतर रणनीति के साथ उतरेगी.