छत्तीसगढ़ सरकार ने साल 2018-19 का बजट पेश कर दिया है. इस बजट में शिक्षा​कर्मियों के उम्मीद को झटका लगा है. चुनावी साल के इस बजट में शिक्षाकर्मियों के लिए विशेष प्रावधान करने की उम्मीद लगाई जा रही थी. शिक्षाकर्मी संविलियन की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर हो चुके हैं. हालांकि प्रदेश के सभी अस्पतालों में मुफ्त मेडिकल जांच की घोषणा कर सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देने की कोशिश की है.


बजट में सरकार ने पंचायत सचिव, कोटेवारों का वेतन व मानदेय बढ़ाकर उनके चेहरे पर खुशी की लहर ला दी है. सरकार ने पंचायत सचिवों का भी वेतन बढ़ाया है. बजट में कोटवारों का मानदेय बढ़ाने के लिए ऐलान किया गया है. इसके अलावा डोंगरगढ़ में टूरिज्म रिसोर्ट बनाने का प्रावधान किया गया है.


इस बजट में जिला पंचायत अध्यक्ष का मानदेय भी 10000 से 15000 करने की घोषणा की गई है. इसके साथ ही रोजगार सहायक को 4640 के स्थान पर 6000 रुपए वेतन मिलेगा. बजट में 60 मिनी स्टेडियम के लिए 30 करोड़ का प्रावधान किया गया है.


बजट में सरकार ने शिक्षाकर्मियों के लिए बजट को कोई घोषणा नहीं की है. बता दें कि प्रदेश में शिक्षाकर्मियों की ​संख्या 1 लाख 70 हजार से भी अधिक है. ऐसे में चुनावी साल में उनकी मांगों की अनदेखी करना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है. हालांकि संविंलियन की मांग को लेकर सरकार ने पहले ही शिक्षाकर्मियों को अश्वासन दिए हैं.



बजट पेश करने के बाद सीएम डॉ. रमन सिंह ने प्रतिक्रिया दी है. मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा  बजट में बहुत विश्वास किया चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है और उसकी अनुशंसा आने के बाद शिक्षाकर्मियों के जितने भी उन्होंने अपनी मांग रखी है. उन सब का विचार संगोष्ठी पूरा करके हम शीघ्र निर्णय लेंगे इस बात को स्पष्ट रुप से बजट में रखा गया है.