रेस्टलेस लेग सिंड्रोम एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इस प्रॉब्लम का संकेत कुर्सी या फिर सोफे पर बैठ कर पैरों को लगातार हिलाना है। कई बार यह कुछ लोगों की आदत होती हैं या फिर मानसिक परेशानियों के कारण भी यह समस्या होती है। इसके होने से रात को सोते समय टांगो में बहुत जोर से दर्द होता है जिसके कारण आप चैन की नींद नहीं ले पाते। कभी-कभी कुछ लोगों में पैर हिलाने के लक्षण तो देखे जाते हैं लेकिन उन्हें किसी तरह का दर्द नहीं होता। इसका मतलब यह नहीं कि इस बीमारी से उनके शरीर को कोई नुकसान नहीं होता। अगर इस समस्या का सही समय पर ईलाज न किया जाए तो आपको आगे जाकर इसे ठीक करने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट और साइकोलॉजिस्ट दोनों डॉक्टर से ईलाज कराने की जरूरत पड़ सकती है। आज हम आपको रेस्टलेस लेग सिंड्रोम होने के कारण, ईलाज, लक्षण के बारे में पूरी जानकारी देंगे।


1. किन-किन में देखी जाती है यह समस्या

- जो लोग किसी तनाव के कारण पूरी नींद नहीं ले पाते वह इस बीमारी का शिकार होते हैं।

- कई बार यह प्रॉब्लम ज्यादा देर काम करने वालों को अत्यधिक थकान होने के कारण भी हो सकती है।

- महिलाओं में यह समस्या पीरियड्स के दौरान होने वाले लगातार दर्द के कारण नींद न पूरी होने के कारण होती है। 

- डायबिटीज और पार्किन्सन बीमारी से ग्रसित लोगों में भी यह प्रॉब्लम देखने को मिलती है।


2. इसके लक्षण

- बैठे, लेटे हर समय लगातार पैरों को हिलाना।

- जब पैरों में दर्द और खिंचाव महसूस होता हो।

- रात को अच्छे से नींद न आना बार-बार करवट बदलना।

- पैरों में चुभन जैसी दर्द का होना।


3. दर्द का समय

ज्यादातर इसका दर्द रात को सोने के समय होता है और दिन में ठीक हो जाता है। दिन के समय इस दर्द का कारण लंबे समय तक खड़े रहना या फिर ज्यादा देर पैदल चलने पर होता है।


4. इस बीमारी का कारण

यह बीमारी शरीर में आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन बी12 आदि पोषक तत्वों की कमी से होती है। इसके अलावा डिप्रेशन या एलर्जी की दवाई लगातार खाने से भी रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की समस्या हो सकती है।