जब महीने के शुरुआती हफ्ते में आपके फोन पर सैलरी का एसएमएस आता है तो आपके लिए वह पल बेहद खुशी का होता है. ज्यादातर कंपनियां ऑफर लेटर जारी करते वक्त सभी चीजें सैलरी ब्रेकअप में देती हैं. इसलिए आज हम आपको सैलरी के उस पार्ट की जानकारी दे रहे हैं, जिसके जरिए आप अपना पैसा बचा सकते हैं. अगली स्लाइड जानते हैं आखिर क्‍यों ऐसा करती हैं  कंपनियां...

स्टाफ हायरिंग फर्म टीमलीज की रिपोर्ट बताती है कि कंपनियां वैरिएबल पे की हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं. एंप्लॉयीज और एंप्लॉयर्स के बीच नया कॉम्पेंसेशन स्ट्रक्चर बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल वेतन में वेरिएबल पे की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 10.6 प्रतिशत पर पहुंच गर्इ है. अगली स्लाइड में जानते हैं कैसे होता है आपको फायदा....

रिपोर्ट के मुताबिक, केवल वैरिएबल पे में ही इजाफा नहीं हुआ है, कुल वेतन में फ्लेक्सी बेनिफिट की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है. कर्मचारी और कंपनी दोनों के लिए यह फायदेमंद है. इस तरह के मिले-जुले सैलरी स्ट्रक्चर से टैक्स बेनिफिट मिलता है. कंपनी की लागत घट जाती है. अगली स्लाइड में जानिए कौन सी कंपनियां इस तरह से सैलरी दे रही हैं...

नए दौर की कंपनियां इस दिशा में तेजी से बढ़ रही हैं. वेतनवृद्धि, हेल्थकेयर प्लान और परफॉर्मेंस बोनस के बाद कर्मचारियों के लिए प्रफेशनल डिवेलपमेंट और एजुकेशनल बेनिफिट सबसे पसंदीदा होते हैं. अगली स्लाइड में जानिए किस-किस सैलरी में बढ़ रहा है वैरिएबल...

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बढ़ोतरी सभी स्तरों के कर्मचारियों के वेतन में देखी गर्इ है. सीनियर मैनेजमेंट के लिए वेतन में वैरिएबल पे के हिस्से में 25-30 फीसदी की बढ़ोतरी हुर्इ है. 2010 से पहले तक यह 18-20 फीसदी थी. मिडिल मैनेजमेंट के लिए वैरिएबल पे का हिस्सा बढ़कर 18-20 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 10-12 प्रतिशत था. जूनियर मैनेजमेंट के लिए इसकी हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत हो गर्इ है, पहले यह 5-8 प्रतिशत थी.

नौकरी करने वालों के लिए यह समय बहुत खास है, क्योंकि इन दिनों कंपनियों में अप्रेजल की कवायद शुरू हो जाती है और एंप्लॉयीज के काम और प्रतिभा का आकलन किया जाता है. इसीलिए अच्छा अप्रेजल पाने के लिए आपको करनी होती है जद्दोजहद. आज हम आपको इसी जद्दोजहद से बचने के कुछ ट्रिक्स बता रहे हैं जिनसे आपको मिल जाएगा आसानी से अप्रेजल-

कंपनी की उम्मीदें जानिए: अच्छा अप्रेजल पाने के लिए सबसे आपको ये जानना होगा कि कंपनी की आपसे क्या उम्मीदें हैं. यह जानने के बाद ही आप उस दिशा में काम कर सकेंगे और ज्यादा से ज्यादा आउटपुट दे सकेंगे.

लक्ष्‍य बनाएं और उन्हें हासिल करने में जुट जाएं: कंपनी की उम्मीदें जानने के बाद अपने लक्ष्‍य बना लें और शुरू से उन लक्ष्‍यों पर ध्यान दें. वही काम करें जो आपके लिए और कंपनी के लिए फायदेमंद हैं.

रिव्यू के मुताबिक सुधार करें: जब परफॉर्मेंस रिव्यू में आपसे कुछ सुधार करने के लिए कहा जाए तो इसे ध्यान से सुनें. भले ही यह सुनना कठिन हो सकता है, लेकिन वहां अपना बचाव न करें. थोड़ा समय निकालें और अपनी कमियों पर गौर करें और भविष्य में इस तरह के कॉमेंट से बचने के लिए अपनी वर्क हैबिट्स में सुधार की कोशिश करें.

लक्ष्‍यों पर मिशन की तरह काम करें: अपने लक्ष्यों पर सालभर मिशन की तरह काम करें. प्रगति और योगदानों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर बदलाव करें. रोजाना अपने कामों की समीक्षा करें. इससे आपको अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी.

मैनेजर या बॉस के साथ अच्छे रिलेशन रखें: आपके और आपके मैनेजर के बीच अधिकांश बातों पर रजामंदी होनी बहुत जरूरी है. इससे काम अच्छा होता है और बिना किसी झगड़ों के होता है. इससे ऑफिस का माहौल भी कूल रहता है.

अपनी स्किल डेवेलप करने पर जोर दें: अगर आपको अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किसी ट्रेनिंग की जरूरत हो तो बॉस से कहें. इससे बॉस समझेंगे कि आप अपने काम की क्वॉलिटी में सुधार करना चाहते हैं और प्रफेशनल ग्रोथ में दिलचस्पी रखते हैं. इससे आपका स्किल डेवलपमेंट होगा.

पॉजिटिव फीडबैक शेयर करें: जब आप रिव्यू की तैयारी कर रहे होते हैं तो सहकर्मियों का फीडबैक काफी अहम होता है. अगर कोई आपको ईमेल के जरिये या पेपर पर शुक्रिया अदा करता है तो इसे फाइल में रखें. अगर कोई आपकी प्रशंसा में कुछ कहता है तो उसे लिखित में देने को कहें. इससे आपके रिव्यू पर पॉजिटिव असर पड़ेगा.

परफॉर्मेंस को लेकर बॉस से बात करें: अपने परफॉर्मेंस को लेकर साल भर बॉस से खुलकर बात करें, ताकि आपको पता लग सके कि आप कहां हैं और क्या प्रगति हुई है. सारी बातचीत को सालाना रिव्यू पर न छोड़ें.