कोरियाई कार कंपनी किया मोटर्स दो साल से भी ज्यादा अरसे से भारत में कदम रखने की तैयारी कर रही है। आंध्र प्रदेश में कंपनी का संयंत्र भी तैयार हो रहा है और इस बार ऑटो एक्सपो में उसने अपनी तकरीबन सभी गाड़ियों की झलक दिखाई। किया मोटर्स कॉर्पोरेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी (वैश्विक परिचालन) हो सुंग सोंग ने कंपनी की योजना, ई-वाहनों के संबंध में उसके खाके और कीमत तथा व्यवहार को लेकर उसकी समझ के बारे में ऋषभ कृष्ण सक्सेना से बात की। मुख्य अंशः

किया लंबे समय से भारत के बाजार को परख रही है। आपको कौन सी वाहन श्रेणी सबसे माकूल लग रही है?


भारतीय बाजार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर तरह के वाहनों के लिए जगह है। हम भी उसी तर्ज पर चल रहे हैं। किया दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी वाहन विनिर्माता कंपनी है और हमारे पास हर तरह की कार हैं। हम भारत में हरेक श्रेणी की कारें लाएंगे। लेकिन हमारी सबसे पहली प्राथमिकता कॉम्पैक्ट एसयूवी है क्योंकि भारत ही नहीं दुनिया भर में उन्हीं का दौर चल रहा है।

कॉम्पैक्ट एसयूवी को युवाओं से जोड़ा जाता है यानी आपके निशाने पर भी वही ग्राहक वर्ग है...

अगर आप दूसरे देशों में देखेंगे तो वहां गाड़ियों की सबसे ज्यादा खरीद 40 साल या उससे अधिक उम्र के लोग करते हैं। लेकिन भारत में 30 साल के करीब के ग्राहक कार सबसे ज्यादा खरीद रहे हैं। इस लिहाज से यहां का ग्राहक वर्ग ज्यादा युवा है और हम भी उसी का खयाल रखकर शुरुआत करेंगे।


किस बाजार पर आपकी सबसे ज्यादा नजर है?

हम महानगरों और बड़े शहरों से ही शुरुआत करेंगे। लेकिन धीरे-धीरे छोटे शहरों का रुख करना हमारी योजना में शामिल है। हम डीलर नेटवर्क तैयार कर रहे हैं और सर्विस नेटवर्क के दायरे में छोटे शहर भी शामिल होंगे।


आपकी गाड़ियां देखने में महंगी लग रही हैं। इतनी महंगी गाड़ियों से पारी शुरू करना आपको सही लगता है?

ये गाड़ियां केवल किया की ताकत दिखाने के लिए हैं। भारत के लिए हम यहीं के माकूल गाड़ियां उतारेंगे, जिसके लिए हम अब भी बाजार की पड़ताल कर रहे हैं। लेकिन यह तय है कि अगले कुछ साल में हम हर तरह की कार यहां लाएंगे। जहां तक कीमत का सवाल है तो भारतीय ग्राहक बेहतर उत्पाद के लिए ज्यादा रकम खर्च करने को तैयार है। प्रीमियम हैचबैक की बढ़ती बिक्री इसका उदाहरण है और उस तरह की गाड़ियां हमारी योजना में भी शामिल हैं। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हमारी गाड़ियां महंगी ही होंगी। हम उत्पाद और कीमत दोनों मोर्चों पर भारतीय कार कंपनियों को कड़ी टक्कर देंगे।


किया की पहली गाड़ी भारत में कब दिखेगी?

आंध्र प्रदेश में हमारा 3 लाख वाहन सालाना क्षमता वाला संयंत्र बन रहा है, जो 2019 की दूसरी छमाही में तैयार हो जाएगा। हम दूसरी छमाही की शुरुआत में ही पहली गाड़ी उतारने की तैयारी कर रहे हैं।


आप ऐसे मौके पर भारत आ रहे हैं, जब यहां की सरकार पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दे रही है। इससे आपको कोई दिक्कत तो नहीं है?

इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दिया गया तो किया को फायदा ही होगा क्योंकि हमारे पास वैश्विक स्तर पर कई इलेक्ट्रिक माॅडल हैं। हम छोटी एसयूवी के साथ इलेक्ट्रिक वाहन की शुरुआत कर भी सकते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार को हाइब्रिड वाहनों पर जोर देना चाहिए। हमारे पास ई-कार ही नहीं, हाइब्रिड कार और हाइड्रोजन से चलने वाली कार भी हैं। भारत सरकार अगर हाइब्रिड कार पर जोर देती है तो बेहतर होगा। लेकिन ई-कार की ही बात आई तो भी किया पूरी तरह तैयार है।


क्या आपको लग रहा है कि भारत का बाजार ई-कार के लिए तैयार है?

बाजार में तो चुनौतियां हैं। कीमत, बुनियादी ढांचे और नीतिगत तीनों मोर्चों पर और तैयारी की जरूरत है। हालांकि किया की ई-कार एक चार्ज में 430 किलोमीटर फासला तय कर लेती है, लेकिन चार्जिंग स्टेशन का पूरा नेटवर्क तैयार करना जरूरी है। साथ ही ग्राहकों को प्रोत्साहन भी देना होगा।