सोने के खनन को प्रोत्साहित करने के मसले पर नीति-निर्माता पहली बार विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि आर्थिक मामलों का विभाग व्यापक स्वर्ण नीति के पहलू के रूप में घरेलू स्तर पर सोने के खनन को प्रोत्साहित करने के एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।  हालांकि यह पता नहीं चल पाया कि खनन के मसले को पहले चरण में उठाया जाएगा या इस पर बाद में विचार किया जाएगा क्योंकि इसके लिए खनन एवं वन मंत्रालयों की राय भी लेनी होगी। हालांकि उद्योग के विशेषज्ञों ने सरकारी रिपोर्टों का हवाला देते हुए सरकार से कहा है कि अगर खनन को प्राथमिकता दी जाए और आसानी से मंजूरियां दी जाएं तो भारत में हर साल कम से कम 100 टन सोने का खनन हो सकता है, जो इस समय मुश्किल से 2 टन है। 



इंडियन बुलियन  ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, 'यह जरूरी है कि केंद्रीय बजट में घोषित प्रस्तावित स्वर्ण नीति में खदान से लेकर बाजार तक की पूरी आपूर्ति शृंखला को शामिल किया जाए। सोने-चांदी और आभूषणों के नियमन को लेकर काफी कुछ कहा जा चुका है, लेकिन अब देश में स्वर्ण खदानों में खनन को लेकर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। इससे केवल देश की विदेशी मुद्रा बचेगी बल्कि इससे खनन और रिफाइनिंग क्षेत्र में बहुत से रोजगार अवसर भी सृजित होंगे।'


वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा है कि एक व्यापक स्वर्ण नीति बनाई जा रही है। इस नीति में सोने की खरीद से लेकर कारोबाार और निवेश तक हर का हर पहलू है, लेकिन विशेषज्ञों ने प्रस्ताव रखा है कि देश में सोने के खनन को प्रोत्साहित किए बिना यह नीति अधूरी है।


गैलेक्सी गोल्ड माइंस के प्रबंध निदेशक निक स्पेंसर ने कहा, 'भारत में पहले ही 100 टन सोने को खनन योग्य भंडार और खदान विकसित करने के लिए तैयार घोषित किया जा चुका है। केंद्रीय खनन मंत्रालय द्वारा स्वर्ण एवं कीमती धातुओं पर गठित एक कोर ग्रुप को सौंपी गई एक रिपोर्ट का हवाला दिया। समूह ने 1 अप्रैल 2011 को देश में 658 स्वर्ण धातु भंडार होने की पहचान की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि यह भंडार देश के 13 राज्यों में है। इस मात्रा में से 167 टन (139 टन कर्नाटक में और आंध्र प्रदेश में महज 27.5 टन) को इस लिहाज से भंडार घोषित किया गया कि इसका खनन करना आर्थिक रूप से व्यावहारिक है। शेष करीब 491 टन स्वर्ण धातु को ऐसा संसाधन माना गया है, जिसमें 265 वास्तव में ड्रिल करके पहचाने गए संसाधन हैं, जबकि शेष 226 टन को संभावित संसाधन माना गया है।' 



इससे पहले निक कोलार गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक प्रबंध निदेशक थे। कोलार गोल्ड भारतीय खनन कंसोर्टियम है, जो लंदन में सूचीबद्ध है। अब वह भारत में आ गए हैं और उन्होंने गैलेक्सी गोल्ड माइंस की स्थापना की है। कंपनी त्रिस्तरीय रणनीति के साथ भारत में आधुनिक स्वर्ण खदानें विकसित एवं बनाने में मदद करती है।  उन्होंने देश में जल्द से जल्द सोने का उत्पादन शुरू करने और भारत को डोर सोने की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तंजानिया  की एक नई स्वर्ण खदान के साथ संयुक्त उद्यम बनाया है, जिसमें 2018 के अंत तक हर साल 1 से 2 टन सोने का उत्पादन शुरू हो जाएगा।  उन्होंने अपनी अफ्रीकी खान में उत्पादित पूरे गोल्ड डोर की बिक्री भारतीय रिफाइनरियों या सराफों को करने की योजना बनाई है ताकि देश में सोने की उपलब्धता में कमी दूर हो। दूसरा गैलेक्सी भारतीय रिफाइनरों और सराफों के लिए गोल्ड डोर की भारत और अफ्रीका से खरीद एवं रिसाइक्लिंग करेगी।