दुर्ग जिले के कलेक्टर के विरोध में अब सरकारी अधिकारी कर्मचारी भी उतर आए हैं. कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन ने अब आंदोलन का रुख इख्तियार कर लिया है. सोमवार को छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन से जुडे़ शासकीय कर्मचारियों ने दुर्ग में एक धरना प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद किआ और कलेक्टर के आदेश को तुगलकी फरमान घोषित कर दिया. बता दें कि दुर्ग कलेक्टर उमेश अग्रवाल ने पिछले दिनों समस्त अधिकारियों को अपने मुख्यालय में रहने के सख्त निर्देश दिए थे और मुख्यालय छोड़कर जाने वालों का किराया भत्ता काटे जाने का आदेश दिया था.


कलेक्टर के इसी आदेश का अधिकारी और कर्मचारी विरोध कर रहे हैं. जिसके विरोध स्वरूप कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया और अपना विरोध दर्ज कराया. अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि जिला मुख्यालय में सरकारी आवासों की कमी है. स्कूल उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में जरूरी नहीं है कि वे मुख्यालय में रहें, लेकिन वे समय पर आकर कार्य करने को बाध्य है.


इस संबंध में छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारी कलेक्टर से मिले और एक ज्ञापन उन्हें सौंपा है. जिस पर उचित कार्रवाई का कलेक्टर ने आश्वासन दिया था. अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि किराय भत्ता काटने का हक कलेक्टर के पास नहीं है.


बहरहाल कलेक्टर के आश्वासन मिलने पर अधिकारी शांत तो हो गए हैं, लेकिन इनकी बात अनसुनी होने पर यह मामला तूल जरूर पकड़ सकता है. शासकीय अधिकारी कलेक्टर के खिलाफ जा सकते हैं.