नई दिल्ली 2019 का लोकसभा चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल से ज्यादा ध्रुवीकरण की पिच पर होने की संभावना नजर आ रही है. इसी के मद्देनजर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. संघ परिवार तीन तलाक और राम जन्मभूमि मंदिर जैसे मुद्दे को गरमाने की कोशिश में जुट गया है. वहीं मुजफ्फरनगर दंगे के मामले में बीजेपी नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने की मांग उठने लगी है. ऐसे में योगी सरकार अगर दंगे के आरोपियों से केस वापस लेती है तो ये चुनाव में गेम चेंजर मुद्दा बन सकता है.


अयोध्या विवाद मामला


सुप्रीम कोर्ट में आठ फरवरी से अयोध्या मामले में सुनवाई शुरू हो रही है. शनिवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कानून विशेषज्ञों के साथ बैठक करके इसकी तैयारी को अंतिम रूप दिया. वहीं विश्व हिंदू परिषद भी नहीं चाहता है कि कानूनी प्रक्रिया में उनकी वजह से कोई देरी हो, इसके मद्देनजर वो भी तैयार है.


सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तीन जजों की बेंच प्रतिदिन 3 घंटे सुनवाई करेगी. माना जा रहा है कि 30 दिन की कार्यवाही में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो जाएगी और 16 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही बेंच फैसला सुरक्षित कर लेगी. माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या मामले का फैसला आ जाएगा. ऐसे में इस मुद्दे पर सियासत फिर शुरू हो सकती है.


बता दें अयोध्या मामले पर लंबे समय से राजनीति होती रही है. बीजेपी इसी मुद्दे के सहारे दो सीट से बढ़कर आज पूर्ण बहुमत के साथ देश की सत्ता पर विराजमान है. ऐसे समय में जब मोदी सरकार को विपक्ष रोजगार, किसानों और महंगाई सहित कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में अयोध्या मुद्दा बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हो सकता है.


तीन तलाक बिल मामला


मोदी सरकार ने तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को निजात दिलाने का बीड़ा उठाया है. सरकार ने तीन तलाक विरोधी बिल को लोकसभा में पास भी करा लिया, लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस और विपक्षी दलों के यू टर्न लेने से बिल अटक गया है. मोदी सरकार हालांकि संदेश दे रही है कि वो कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकेगी और मुस्लिम तुष्टिकरण की बजाय मुस्लिम सशक्तिकरण के लिए काम करेगी. इससे जहां बीजेपी को मुस्लिम महिलाओं का वोट मिलने की उम्मीद है, वहीं बहुसंख्यक समाज के भी वो लोग जो कांग्रेस से मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से नाराज रहते थे, बीजेपी के खेमे में मजबूती से जुड़ेंगे.


मुजफ्फरनगर दंगा केस वापसी


उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए दंगों का मामला फिर चर्चा में है. अब बीजेपी नेताओं पर दंगों के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग उठने लगी है. दंगे में आरोपी बीजेपी नेता संजीव बालियान, संगीत सोम व 10 खाप नेताओं ने मुकदमा वापस लेने के संबंध में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. इन लोगों को सीएम ने कानूनी राय लेने के बाद मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है. माना जा रहा है कि मुजफ्फरनगर दंगों में आरोपी करीब चार सौ लोगों पर दर्ज मुकदमे सरकार वापस ले सकती है.


योगी सरकार मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों से केस वापस लेती है तो 2019 के चुनाव में ये बड़ा मुद्दा होगा. बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए मुजफ्फरनगर दंगा संजीवनी साबित हुआ था. सूबे में पार्टी 10 सांसदों से सीधे 71 पर पहुंच गई. इस अभूतपूर्व प्रदर्शन के पीछे मुजफ्फरनगर दंगा भी अहम फैक्टर माना जाता है.