भारतीय संस्कृति में मां को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। मां के बगैर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है और मां से ही जगत का सार है। इसलिये मां के सम्मान से ही व्यक्ति के दुख-सुख की कल्पना की जाती है।इसी तरह ग्रहों का हमारे जीवन से प्रत्यक्ष रूप से संबंध है। व्यक्ति के जन्म लेने के साथ ही ग्रहों की दशाओं का चक्र प्रारंभ हो जाता है और हर ग्रह आपके रिश्तों से जुड़ा रहता है। इसलिए रिश्तों को मजबूती देकर आप अपने ग्रहों को मजबूत कर अपना जीवन सफल बना सकते हैं।


अब बात करते हैं मां और उसके ग्रह से संबंध के बारे में। मां का सीधा संबंध चंद्र ग्रह से होता है। ज्योतिष में चंद्रमा को स्त्रीग्रह माना गया है। मन और माता दोनों का कारक चंद्र ग्रह है।


ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रह को मजबूती प्रदान करने के लिए मां का ख्याल रखना, उनकी सॆवा करना और उनको सम्मान देना बेहद जरूरी है। मां को सम्मान देने से शुभाशिष मिलते हैं ,जो चंद्र ग्रह को प्रबल करते हैं, जिससे उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति बेहतर होती है और वह बड़ी से बड़ी परेशानियों का दृड़ता से मुकाबला कर सकता है।


यदि किसी व्यक्ति ने मां का अपमान किया या उनको दुख पहुंचाया तो दूसरे दुखों के साथ मानसिक त्रास की भयावह स्थिति से गुजरना पड़ता है।


कुंडली के पहले भाव में यदि चंद्रमा है तो व्यक्ति के अंदर अपनी मां के सभी लक्ष्ण मौजूद रहते हैं। व्यक्ति पर उसकी मां का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है और इस तरह का वह मां को हमेशा खुश रखता है। इस तरह के व्यक्ति का अपनी मां से दिल से लगाव होता है, जिससे वह जीवन में उन्नति करता है और जीवनभर समृद्ध रहता है।


कुंडली के चौथे भाव में चंद्रमा के होने पर भी मां के गुण व्यक्ति को मिलते हैं। जिस व्यक्ति की कुंडली के चौथे भाव में चंद्रमा होता है, उसको हमेशा अपनी मां के पैर छूना चाहिए।


कुंडली के सातवें घर में चंद्रमा के होने से व्यक्ति को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सातवां घर मां और पत्नी के बीच के रिश्तों को खराब करता है, ऐसे में जातक अगर मां का कहना नहीं मानता है, तो उसे तनाव और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


कुंडली के आठवे भाव में चंद्रमा के होने पर मातृत्व सुख के साथ शिक्षा का अभाव बना रहता है। यह भाव मंगल और शनि के अंतर्गत आता है। यहां पर स्थित चंद्रमा जातक की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। यदि शिक्षा अच्छी है तो जातक की मां का जीवन छोटा होता है, लेकिन अक्सर यही देखने को मिलता है कि जातक के जीवन में शिक्षा और मां दोनो का अभाव रहता है।


कुंडली में यदि चंद्रमा ग्यारहवे और बारहवे भाव में है तो केतु की वजह से दिक्कतें खड़ी होती है। ग्यारहवे भाव में चंद्रमा हो और केतु चौथे भाव में हो तो व्यक्ति की मां का जीवन खतरे में रहता है। बारहवे भाव में चंद्रमा हो और केतु चौथे भाव में होकर कमजोर हो तो जातक के पुत्र और मां पर प्रतिकुल असर पड़ता है।