ग्वालियर। प्रदेश की जमीनों के रिकॉर्ड में हेराफेरी अब नहीं हो पाएगी। एमपी लैंड रिकॉर्ड ने अपने डाटा को सुरक्षित करने के लिए एक नए सिस्टम को शुरू किया है। इसमें लैंड रिकॉर्ड का मूल डाटा कितनी जगह सुरक्षित रखा जाएगा, ये पता ही नहीं चल सकेगा।


डाटा को हैक करने की कोशिश करने वाला बेसिक डाटा यानि मास्टर डाटा तक पहुंच ही नहीं पाएगा। डाटा की एक कॉपी को हैक कर भी लिया तो सर्वर में अलग अलग जगह सुरक्षित डाटा रहेगा जिससे हैकिंग का कोई मतलब ही नहीं रहेगा। लैंड रिकॉर्ड में यह प्रोसेस शुरु हो गई है जो कि जून तक पूरी कर ली जाएगी। जून के बाद डाटा 100 फीसदी सुरक्षित हो जाएगा।


ज्ञात रहे कि जमीनों के रिकॉर्ड में हेरफेर के कई मामले सामने आने के बाद से लैंड रिकॉर्ड विभाग ने यह तैयारी की है। प्रदेश में इंदौर,ग्वालियर सहित अलग अलग जगह सरकारी भूमि को लैंड रिकॉर्ड के डाटा में निजी बनाने की धोखाधड़ी सामने आ चुकी है। जिसमें शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। डिजिटल रिकॉर्ड में पटवारी को जारी किए गए लॉग-इन आईडी व पासवर्ड को हैक करके यह कारनामा किया जाता था। वहीं इसकी पड़ताल तक में यह साफ नहीं हो पाता था कि कितने रिकॉर्ड में गडबड़ी की गई है।


ऐसे सुरक्षित रहेगा डाटा


लैंड रिकॉर्ड का बेसिक डाटा सर्वर में सुरक्षित रहेगा। इसके बाद इस डाटा की सैकड़ों कॉपियां तैयार की जा रही हैं और उन्हें अलग अलग जगह सुरक्षित रखा जाएगा। विभाग के टॉप चुनिंदा अधिकारियों के पास ही मास्टर डाटा को एक्सेस करने की अथॉरिटी रहेगी। कॉपियों में जो डाटा रहेगा वह विभाग के चैनल में रहेगा। डाटा की एक कॉपी में यदि छेड़छाड़ की जाती है तो विभाग को पता चल जाएगा कि कहां हैकिंग की कोशिश की गई है।


यहां हो चुकी है गड़बड़ियां


इंदौर में लैंड रिकॉर्ड डाटा में गड़बड़ी का मामला सामने आ चुका है। जिले के भितरवार में फर्जी एंट्रियां पकड़ी गई थीं, जिसमें अधिकारियों की जानकारी के बिना ही उनकी आईडी का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में क्राइम ब्रांच ने बिलौआ के पास जमीन के रिकॉर्ड में डिजिटल हेराफेरी पकड़ी थी, जिसमें लैंड रिकॉर्ड के कर्मचारी व रिटायर्ड पटवारी पकड़े गए थे।


सुरक्षा प्रणाली मजबूत करना प्राथमिकता


लैंड रिकॉर्ड के डाटा को पूरी तरह सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। जमीनों के रिकॉर्ड में हेराफेरी के मामले पहले सामने आ चुके हैं, हैकिंग भी की गई है। अभी यही चुनौती है कि डाटा को प्रोटेक्ट किया जाए। गड़बड़ आगे न हो इसके लिए तैयारी की जा रही है। डाटा इतनी जगह सुरक्षित होगा कि गड़बड़ी की संभावना नहीं रहेगी। 


एम सेलवेनद्रन,आयुक्त,एमपी लैंड रिकॉर्ड