इंदौर/महू। प्रधानमंत्री आवास योजना में इंदौर जिले के उत्कृष्ट प्रदर्शन का दावा जिले की महू तहसील में खोखला नजर आ रहा है। जनपद पंचायत महू तहसील में सभी 1741 आवास पूरी तरह निर्मित बता रही है, जबकि हकीकत में कई आवासों की सिर्फ दीवारें खड़ी हैं। अधिकारियों के दबाव में जिला पंचायत के कागजों में अधूरे आवासों को पूर्ण दिखा दिया गया है। सरकार के खाते से राशि भी नहीं निकली और काम पूरा हो गया।

 महू तहसील की चोरल ग्राम पंचायत में करीब 36 भवन बनाए गए हैं। 15-16 भवनों की तो छत नजर नहीं आई। उनमें शौचालय तक नहीं बने। चोरल ग्राम के ताराचंद पहले झोपड़ी में रहते थे। आवास योजना में उनसे झोपड़ी की जगह पक्का घर बनाने को कहा गया। काम शुरू हुआ। सिर्फ दीवारें बनी लेकिन आवास पूर्ण बताया जा रहा है।

उन्हें तीन किस्तों में 40-40 हजार (कुल 1.20 लाख) मिले लेकिन शेष 15 हजार रुपए अब तक नहीं मिले। चोरल के ही मोहम्मद सलीम के घर पर को भी पूर्ण बताया गया है, जबकि छत नदारत है। जनपद पंचायतकर्मियों ने घर के आगे दो फीट तक कवेलू लगा दिए हैं ताकि लगे कि घर में कोई रहता है। उन्होंने बताया कि हमें तीन किस्तों में 1.20 लाख ही मिले। कहा जा रहा है कि अब पैसे नहीं मिलेंगे। घर की छत और शौचालय नहीं बने हैं। जब पैसा कमाएंगे तब बनाएंगे।

आधे-अधूरे आवास

बाईग्राम पंचायत में 43 भवन बनने थे लेकिन मौके पर 12-15 भवन अधूरे मिले। यहां रतन पिता धर्मा और कैलाश पिता रतन ने बताया कि उनके आवासों में छत नहीं बनी है लेकिन सरकारी दस्तावेज में पूर्ण मान लिया गया है। तहसील की छापरिया पंचायत में 86 आवास बनने थे लेकिन करीब 30 अधूरे हैं। कालाकुंड पंचायत में करीब 82 आवास बनाए गए हैं। ग्राम के प्रकाश सिंह अपने आवास की अधूरी छत बनाते नजर आए। हालांकि शासकीय रिकॉर्ड में उनका आवास पूर्ण बताया गया है। मौके पर 30 से अधिक अधूरे आवास मिले।

बिना पैसे कैसे बने!

हास्यास्पद बात यह है कि महू जनपद क्षेत्र में बनाए गए मकान बिना पूरी सरकारी मदद के बन गए। जिन हितग्राहियों के मकान कागज पर पूर्ण बताए जा रहे हैं, उन्हें 40 हजार रुपए की दो या तीन किस्तें ही मिली हैं। शौचालय के 12 हजार और मजदूरी के 15 हजार मिलना बाकी हैं। आवासों के पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी हो चुके हैं। ऐसे में हितग्राहियों को पैसा कहां से मिलेगा।

पुरस्कार के लिए जल्दबाजी!

कहा जा रहा है कि आवास योजना का काम तेजी से करने पर इंदौर के अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। इसी वजह से जिला पंचायत और प्रशासन ने अमले पर दबाब बनाकर काम पूरा दर्शाने को कहा। कुछ ग्राम पंचायत सचिवों के मुताबिक उन पर इतना अधिक दबाव था कि उन्हें अपना वेतन तक आवासों को पूर्ण करने में लगाना पड़ा। आधे-अधूरे काम के बावजूद इंदौर जिले की रैंकिंग में पिछले कुछ दिनों में अप्रत्याशित उछाल आया है। दिसंबर तक जिले की रैंकिंग आठवीं थी लेकिन अब पहले-दूसरे पर पहुंच गई है। इंदौर की रैंकिंग बढ़ने पर अन्य जिलों के अधिकारियों ने भी आपत्ति ली है।


जिला पंचायत सीईओ कीर्ति खुरासिया से सीधी बात

जिले में क्या सभी हितग्राहियों के आवास तैयार हो गए हैं?

- कुछ छोटा-मोटा काम बाकी है लेकिन यह बड़ी समस्या नहीं।

क्या आपने गांवों में जाकर काम देखा है?

- हम और हमारे अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

कई हितग्राहियों के मकानों की छत नहीं है और आपकी सूची में उनके मकान पूर्ण बताए गए। ऐसा क्यों?

- हमें बताइए ऐसा कहां है, जांच की जाएगी।

जब आप कह रही हैं कि लगातार निगरानी की गई, तो काम अधूरा कैसे रह गया?

- आपके पास जानकारी हो तो हमें बताएं, हम दुरुस्त करेंगे।

क्या इस बार भी इंदौर पुरस्कार की दौड़ में होगा?

- हमने अच्छा काम किया है, निश्चित ही होगा।