उज्जैन। महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि पर्व सोमवार से मनाया जाएगा। इस दिन से बाबा महाकाल दूल्हा बनेंगे। 13 फरवरी तक राजाधिराज महाकाल को अलग-अलग वस्त्र, आभूषण, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से शृंगारित किया जाएगा। 13-14 की मध्यरात्रि को राजाधिराज सेहरा धारण करेंगे।


बताते चलें कि शिव नवरात्रि की शुरुआत भगवान महाकाल को हल्दी, उबटन लगाकर दूल्हा बनाकर होगी। दोपहर में संध्या पूजा बाद भगवान को नए वस्त्र एवं सोला धारण कराएंगे। 6 फरवरी को शेषनाग, 7 फरवरी को घटाटोप, 8 फरवरी को छबीना, 9 फरवरी को होलकर, 10 फरवरी को मनमहेश, 11 फरवरी को उमा महेश, 12 फरवरी को शिव तांडव रूप में दर्शन देंगे।


13 फरवरी को दिन-रात शिवरात्रि की पूजा चलेगी। महाशिवरात्रि की रात्रि में मंदिर गर्भगृह में महाकालेश्वर भगवान की महापूजा होगी। इसके बाद 14 फरवरी को प्रात: 4 बजे भगवान को सप्तधान का मुघौटा धारण कराया जाएगा। बाबा महाकाल सवामन फूलों का पुष्प मुकुट धारण कराया जाएगा।


14 फरवरी को दोपहर में 12 बजे भस्म आरती होगी। वर्ष में एक बार शिवरात्रि के दूसरे दिन महाकाल की भस्मारती तड़के 4 बजे की जगह दिन में की जाती है। भस्म आरती बाद भोग आरती होगी।


काल सर्प योग की शांति


श्री महाकालेश्वर मंदिर पर महाशिवरात्रि के अवसर पर 13 फरवरी को काल सर्प योग की शांति के लिए पूजा कराई जाएगी। कुंडली में राहू और केतु के बीच में सभी ग्रह आ जाने से काल सर्प योग बनता है। काल सर्प योग होता है उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


ऐसे जातकों को सपने में नाग दिखना, परिश्रम करने के बाद सफलता नहीं मिलना, मानसिक तनाव से ग्रस्त रहना, गुप्त शत्रु होना, पारिवारिक कलह होना, शादी विवाह में बाधा, विद्या में रुकावट, संतान में बाधा, दांपत्य जीवन में परेशानी, पितृ दोष, पूर्व जन्म कृत दोष, हमेशा बीमार रहना, शारीरिक कष्ट जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।