नई दिल्ली: साल के पहले ही महीने के आखिरी दिन लगने वाला पहला चंद्रग्रहण बेहद खास माना जा रहा है. दुनियाभर में अलग-अलग जगहों पर इसकी कई आकर्षित कर देने वाली तस्वीरें भी जारी की गई. दुनिया ने इस चांद को बेहद ही अलग नाम रखा, जिसे अभी तक कुछ लोग समझ पाए और कुछ अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं कि आखिर चांद को Super Blue Blood Moon नाम क्यों दिया गया. आखिर इसके पीछे की क्या वजह है. आइए हम आपको बताते हैं कि 31 जनवरी को दिखने वाला चांद क्यों सबके लिए बेहद खास रहा. 

बुधवार की शाम 6 बजकर 21 मिनट पर पृथ्वी की छाया चांद पर रही और अंधेरा छाया रहा. यह चंद्रग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन तीन खगोलीय घटनाएं एक साथ हो रही हैं- सुपरमून, ब्‍लूमून और ब्‍लडमून. तीनों के नामों को मिलाकर 'सुपर ब्लू ब्लड मून' नाम रखा गया. यह खगोलीय घटना को एक साथ कहने के लिए ऐसा नाम दिया गया है. 


क्या होता है सुपरमून?

चांद और धरती के बीच की दूरी सबसे कम हो जाती है और चंद्रमा अपने पूरे शबाब पर चमकता दिखाई देता है. यह पिछले साल 3 दिसंबर को भी दिखाई दिया था. चांद की तुलना में 14 फीसद ज्यादा बड़ा और 30 फीसद तक ज्यादा चमकीला दिखेगा. इस महीने पूर्ण चंद्रमा दिखने की घटना हो रही है. इस कारण इसे ब्लू मून भी कहा जा रहा है.

क्या होता है ब्लू मून?

NASA के मुताबिक, ब्लू मून ढाई साल में एक बार नजर आता है. स्पेस डॉट कॉम की खबर के मुताबिक चंद्रमा के नीचे का हिस्सा ऊपरी हिस्से की तुलना में ज्यादा चमकीला दिखाई देता है और नीली रोशनी फेंकता है. आज के बाद ये 2028 और 2037 में देखने को मिलेगा.

क्या होता है ब्‍लड मून?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी एवं चंद्रमा ऐसी स्थिति में होते हैं कि कुछ समय के लिए पूरा चांद अंतरिक्ष में धरती की छाया से गुजरता है. लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते वक्त सूर्य की लालिमा वायुमंडल में बिखर जाती है और चंद्रमा की सतह पर पड़ती है. इसे ब्लड मून भी कहा जाता है. ये तीनों घटनाएं एक ही दिन हो रही हैं, इसलिए इसे सुपर ब्लू ब्लड मून भी कहा जा रहा है.