माघ पूर्णिमा' या 'माघी पूर्णिमा' का हिन्दू धर्म में अपना अलग महत्त्व है। ऐसे तो हर पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन माघ पूर्णिमा की बात सबसे अलग है। यह पूर्णिमा आज है। इस दिन स्नान-ध्यान करने से मनोकामनाएं पूर्ण तो होती ही हैं, साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस पर चन्द्रग्रहण के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। 

माघ पूर्णिमा कथा 

शास्त्रों में एक प्रसंग है कि 'भरत ने कौशल्या से कहा कि यदि राम को वन भेजने में उनकी किंचितमात्र भी सम्मति रही हो तो वैशाख, कार्तिक और माघ पूर्णिमा के स्नान सुख से वह वंचित रहेंगी। उन्हें निम्न गति प्राप्त हो।' यह सुनते ही कौशल्या ने भरत को गले से लगा लिया।' इसी तथ्य से हमें इस अक्षुण पुण्यदायक पर्व का लाभ उठाने का महत्त्व पता चल जाता है। माघ पूर्णिमा कल्पवास 

'माघ पूर्णिमा' कल्पवास की पूर्णता का पर्व है। एक माह की तपस्या इस तिथि को समाप्त हो जाती है। कल्पवासी अपने घरों को लौट जाते हैं। इस कारण से स्वाभाविक ही है कि संकल्प की संपूर्ति का संतोष एवं परिवार से मिलने की उत्सुकता उनके हृदय में उत्साह का संचार करती है। इस तरह यह स्नान पर्व आनंद और उत्साह का पर्व भी बन जाता है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में माघ पूर्णिमा 

संगम में माघ पूर्णिमा के स्नान को प्रमुख माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व जल में भगवान का तेज रहता है, जो पाप का शमन करता है। 'निर्णयसिन्धु' में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। 'ब्रह्मवैवर्तपुराण' में उल्लेख है कि माघी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं, अत: इस पावन समय गंगाजल का स्पर्शमात्र भी स्वर्ग की प्राप्ति देता है। इस वर्ष माघ पूर्णिमा पर ग्रहण भी लग रहा है ऐसे में गंगा स्नान अत्यंत पुण्यदायी है। 


माघ पुराण का महत्व 

पुराणों में कहा गया है कि भगवान विष्णु व्रत, उपवास, दान से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना अधिक प्रसन्न माघ स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन ग्रंथों में नारायण को पाने का आसान रास्ता माघ पूर्णिमा के पुण्य स्नान को बताया गया है। भृगु ऋषि के सुझाव पर व्याघ्रमुख वाले विद्याधर और गौतम ऋषि द्वारा अभिशप्त इन्द्र भी माघ स्नान के सत्व द्वारा ही शाप से मुक्त हुए थे।