सेक्स और इससे जुड़ी बातों के बारे में बात करना आज भी हमारे समाज में वर्जित है। नतीजतन हम में से अधिकतर लोग सेक्स से जुड़े मिथक और झूठी बातों को सच मानते हुए बड़े हो जाते हैं। हमने 7 लोगों से बात की और जानना चाहा उन मिथकों के बारे में जिन्हें वे लोग अब तक सच मानते आ रहे थे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें...

'मैं हमेशा सोचता था कि सेक्स का मतलब है एक ही बेड पर विपरित लिंग के किसी व्यक्ति के साथ बिना कपड़ों के लेटना और एक दूसरे को गले लगाना। मेरा यह मिथक तब दूर हुआ जब मैंने एक हॉलिवुड फिल्म का कामुक सीन देखा और अपने स्कूल के सीनियर्स के साथ इस टॉपिक के बारे में चर्चा की।'

'मुझे हमेशा लगता था कि सेक्स के दौरान एक साथ दो कॉन्डम का इस्तेमाल करने से बेहतर प्रोटेक्शन मिलती है और ऐसा करने से किसी महिला के प्रेग्नेंट होने की संभावना शून्य हो जाती है। बाद में मैंने जाना कि एकसाथ दो कॉन्डम का इस्तेमाल करने से कॉन्डम के बीच घर्षण ज्यादा होती है जिससे सेक्स के दौरान ही उसके फटने की आशंका रहती है।'

24 साल की उम्र तक मैं यह समझता था कि महिलाएं हस्तमैथुन नहीं कर सकतीं और मेरे इस मिथक की सच्चाई का खुलासा तब हुआ जब मैंने एक ऑनलाइन आर्टिकल पढ़ा। काश, हमारे स्कूल की किताबों में सेक्स के बारे में भी अलग और डिटेल चैप्टर होता।

शादी से पहले तक मैं सोचता था कि पुलिंग आउट की प्रैक्टिस सेफ है। मेरी पत्नी ने मुझे इस बारे में गूगल पर कई जानकारियां दिखायीं और मैं सच्चाई जानकर हैरान रह गया।

'मैं आठवीं क्लास में था जब मुझे पहली बार इरेक्शन महसूस हुआ था। यह देखकर मैं घबरा गया और मुझे लगा कि मेरे साथ कुछ गलत हो रहा है। मुझे इस बात को लेकर शर्मिंदगी महसूस होने लगी और मैंने इस बारे में किसी से बात नहीं की और तीन दिन तक अकेले रोता रहा। आखिरकार मैंने अपने कजिन से यह बात शेयर की और उन्होंने मुझसे कहा कि इरेक्शन होना एक सामान्य बात है।'

'मेरे दोस्तों ने मुझे बताया था कि जब आप पहली बार अपनी वर्जिनिटी लूज करते हैं उस वक्त सबसे ज्यादा दर्द होता है। इनमें से एक तो यहां तक कहा था कि फर्स्ट टाइम सेक्स के बाद लड़कियां को कई-कई दिन तक ब्लीडिंग होती रहती है और मैंने उनकी बातों पर अंधविश्वास किया। यही वजह थी कि फर्स्ट टाइम सेक्स से पहले मैं खून और दर्द की बातें याद कर जरूरत से ज्यादा डरी हुई थी।'

'मैंने एक बार अपनी मम्मी से पूछा था कि बच्चे कैसे पैदा होते हैं और उन्होंने जवाब दिया था कि बच्चे भगवान का तोहफा हैं शादीशुदा महिलाओं को। जब भगवान को लगता है कि सही समय आ गया है तो वह बच्चों को उनके पास भेज देते हैं। मैं हमेशा इस बात में यकीन करता रहा कि एक लड़की को शादी के बाद प्रेग्नेंट होने के लिए भगवान से प्रार्थना करनी पड़ती है।'