इंदौर। पेमेंट वॉलेट हैक कर रुपए निकालने वाले तीन आरोपियों को साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। इनमें से एक नाबालिग है और दूसरा मोबाइल दुकान संचालक। तीनों गांव में बैठकर लोगों के नाम की दूसरी सिम ले लेते थे। उसके बाद आधार कार्ड से लिंक कर नकली क्लोन वॉलेट बना लेते। फिर असली वॉलेट से रुपए ट्रांसफर कर लेते थे। यह गोरखधंधा वाट्सएप ग्रुप पर चल रहा था। तीनों आरोपियों ने 22 राज्यों के 11 हजार लोगों को जोड़ा था। यह सभी धोखाधड़ी में लिप्त है।


एसपी साइबर सेल जितेंद्र सिंह ने बताया कि 29 नवंबर 2017 को अमन अग्रवाल निवासी टेलीफोन नगर ने शिकायत की थी कि उन्हें वाट्सएप पर मैसेज आया कि वॉलेट पर दो हजार रुपए लोड करने पर 23 सौ रुपए मिलेंगे। अग्रवाल ने दो हजार रुपए जमा किए। कुछ देर बाद बिना जानकारी के किसी ने वॉलेट हैक किया और रकम निकाल ली। जांच की तो पता चला कि रकम एक क्लोन वॉलेट में ट्रांसफर की गई। वहां से अन्य वॉलेट में होती हुई एक बैंक खाते तक पहुंची। खाताधारक की छानबीन की तो पता चला कि खाताधारक सोहेल पिता गफूर पटेल (19) निवासी पलवाड़ा है।


वॉलेट चलाने वाला राजगढ़ जिले के छापरी गांव में रहने वाला एक नाबालिग है। दोनों को पकड़कर पूछताछ की तो उन्होंने खुलासा किया कि वाट्सएप पर 22 राज्यों के युवक इस जालसाजी में शामिल हैं। नाबालिग इंटरनेट के माध्यम से वॉलेट हैक करता था। जिस सिम से वह वारदात को अंजाम देता था उसे मोबाइल दुकान संचालक संदीप (20) पिता जगदीश राठौर निवासी खलेली, तहसील कुरावर जिला राजगढ़ 100 से 200 रुपए में बेच देता था। नाबालिग ने हाइक वॉलेट प्रोमोशनल कोड से 25-30 वॉलेट हैक कर 80 हजार रुपए निकालना कबूल किया है।


11 हजार लोगों की छानबीन के लिए बनाई विशेष टीम


एसपी ने बताया कि मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार और झारखंड जैसे 22 राज्यों में इनका नेटवर्क है। आरोपियों से 11 हजार लोग वाट्सएप पर जुड़े हैं। इनकी छानबीन व जानकारी जुटाने के लिए विशेष टीम बनाई है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि धार व राजगढ़ शहर के कई नाबालिग लड़के आरोपियों से जुड़े हैं। यह लोग ओटीपी लूट, ओटीपी की दुकान, अखिल भारतीय ओटीपी विक्रेता संघ, ओटीपी मॉल, ओटीपी सेल 24 घंटे, नैनो स्क्रिप्ट ग्रुप जैसे नामों से वाट्सएप ग्रुप चलाते हैं।


ओटीपी नंबर के माध्यम से ही वॉलेट हैक होता है। वाट्सएप ग्रुप में से सात ग्रुप के एडमिन मध्यप्रदेश के हैं। आरोपी 50-50 रुपए के रिचार्ज वाउचर (मैसेज जिसमें लिंक पर क्लिक करने पर वॉलेट में रुपए जमा होने का दावा किया जाता है) को हैक करते थे। ऐसे वह एक दिन में 25 से 30 वॉलेट हैक करते थे।


एक आधार कार्ड से निकालते थे दो सिम


सोहेल आठवीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है। पिता किसान है। संदीप ने सीहोर से बीएससी द्वितीय वर्ष तक पढ़ाई की। उसके बाद उसने कम्‌प्यूटर कोर्स (डीसीए) किया। गांव में उसने मोबाइल दुकान खोल ली। नाबालिग आरोपी संदीप का परिचित था। वह उससे सिम खरीदता था। संदीप के पास जब भी कोई खरीददार सिम खरीदने आता था तब उसका अंगूठा लगता था। अंगूठा लगते ही कम्‌प्यूटर स्क्रीन पर आधार कार्ड आ जाता था। संदीप खरीददार को उसके नाम की सिम निकालकर दे देता था। उसी आधार कार्ड से ग्राहक के नाम की दूसरी मोबाइल कंपनी की सिम इश्यू करवा लेता था।


मोबाइल ऐप से बनाते थे क्लोन


सोहेल का काम वॉलेट का पैसा इधर-उधर करना था। वह जिस ग्राहक की सिम है उसके नाम का फर्जी अकाउंट बनाकर वॉलेट हैक करने का भी काम करता था। सोहेल व नाबालिग ने गूगल पर वॉलेट हैक करने की जानकारी हासिल की। मोबाइल पर ऐप क्लोनर नाम जैसी कई ऐसी एप्लीकेशन आ गई जिसके माध्यम से क्लोन बनाया जा सकता है। इनके माध्यम से जब भी आरोपी वॉलेट हैक करते थे तो उसमें आईईएमआई नंबर बदल जाते थे। जिससे ऐसा पता चलता था कि हैक करने वाले ने अलग-अलग मोबाइल का इस्तेमाल किया है। इन खतरनाक एप्लीकेशन को गूगल प्ले से हटाने के लिए साइबर सेल की टीम ट्राई, सर्ट और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखेगी।


फेसबुक, ट्रू कॉलर, इंडिया मार्ट और विदेशी लोगों का बेचते थे डाटा


आरोपियों ने खुलासा किया कि वह शहर के हिसाब से ट्रू कॉलर का डाटा चार हजार रुपए में, फेसबुक यूजर्स का पांच हजार में, इंडिया मार्ट (इससे जुड़े आठ लाख लोगों का डाटा) का दो हजार में और अमेरिका व यूएई के एक लाख लोगों का डाटा महज पांच-पांच हजार रुपए में बेचते हैं। एक साल से वह इस गोरखधंधे में लिप्त हैं। गांव में रहकर एप्पल और लेनोवो जैसे फोन चलाने वाले इन आरोपियों से जब परिजन पूछताछ करते तो वह बोलते थे कि उन्होंने यह मोबाइल कौन बनेगा करोड़पति प्रतियोगिता में जीता है।