बिलासपुर। कोटा वन परिक्षेत्र के अमले ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लमकेना में छापा मारकर 7 लाख रुपए से अधिक कीमत की सागौन लकड़ी जब्त की है। आरोपियों के यहां से मिनी आरा मशीन भी मिली है। आरोपी अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया से बेखौफ सागौन लकड़ी की तस्करी करते थे। इसके लिए उन्हें कभी नहीं रोका गया।

अचानकमार टाइगर रिजर्व से सटा हुआ गांव लमकेना अवैध सागौन तस्करी के नाम से जाता है। वन अमले को इसकी खबर होने के बाद भी छापा मारने की हिम्मत इससे पहले कभी नहीं की गई। कोटा रेंज के स्टाफ ने इस बार हिम्मत दिखाई और आरोपी रोशन खांडे, दिनेश खांडे, फिरोज अनंत के यहां से बड़े पैमाने पर सागौन लकड़ी जब्त की। शुक्रवार रात तक लकड़ी की गिनती नहीं हो पाई थी। उम्मीद की जा रही है कि जब्त लकड़ी की कीमत 7 लाख रुपए है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे अचानकमार टाइगर रिजर्व और वन विकास निगम के जंगलों से लकड़ी लाया करते हैं। गांव लाने के बाद लकड़ी को आरा मशीन से सिलपट में बदलकर उसे तस्करों को औने पौने दाम पर दे दिया करते थे। टाइगर रिजर्व का अमला उन पर कोई कार्रवाई नहीं करता था। इससे इन लकड़ी चोरों का हौसला बुलंद हो गया था।


उड़नदस्ता करता है दिखावे की कार्रवाई


लकड़ी तस्करों पर कार्रवाई करने के लिए वन विभाग ने डीएफओ उड़नदस्ता गठित किया है। इस टीम ने पिछले सालभर में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। कभी-कभी लावारिस लकड़ी जब्त कर उनके द्वारा दिखावे की कार्रवाई की जाती है। जबकि लकड़ी तस्करी के नाम से बदनाम लमकेना, टिंगीपुर क्षेत्र में अब तक उड़नदस्ता नहीं पहुंचा है। वर्तमान में डीएफओ उड़नदस्ते पर उगाही करने के भी आरोप लग चुके हैं।


सालों से जमे हैं अधिकारी


इस बार छापामार कार्रवाई रेंज स्तर के कर्मचारियों ने की है। जबकि कोटा में मौजूद एसडीओ डीएन त्रिपाठी 22 साल से कोटा क्षेत्र और उसके आसपास ही तैनात रहे हैं। उनकी अगुवाई में भी कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।


लमकेना में तस्करों के सक्रिय होने की सूचना हमें मिल रही थी। इस पर कर्मचारियों ने मुखबिर भेजकर जानकारी जुटाई और फिर छापामार कार्रवाई हुई है। हमें यहां से अच्छी सफलता हाथ लगी है। कार्रवाई में उड़नदस्ता या पुलिस टीम का कोई सहयोग नहीं मिला।


एचके बघेल


रेंजर कोटा, वन विभाग